बेशक, आयशा लड़ाई के लिए नहीं बनींं पर इस तरह मरने को भी नहीं! काश ये जान पातीं
‘अल्लाह से दुआ करती हूं कि अब दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए.’ आयशा! बिल्कुल ठीक कहा. इंसान है ही इतना फितरती. फरेब, बेईमान, हिंसा और औरतों पर राज करने…
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Ansh Mathur
- May 28, 2025
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