#AssamElections 2021: बीजेपी ने मुस्लिमों पर खेला दांव, रोमांचक होगा तीसरे चरण का रण

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असम। अंतिम चरण की 40 सीटों पर असम में चुनाव होने है. 126 विधानसभा सीटों में से दो दौर की 86 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है. ऐसे में असम के तीसरे और फाइनल दौर के चुनावी जंग में मुस्लिम मतदाता काफी अहम भूमिका में है. यही वजह है कि, सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी दलों के गठबंधन के लिए यह चरण सबसे ज्यादा अहम है.

फाइनल दौर में आमने-सामने मुस्लिम प्रत्याशी

फाइनल दौर के चुनावी जंग में कई सीटों पर दोनों ही गठबंधनों की ओर से मुस्लिम प्रत्याशी आमने-सामने हैं. असम विधानसभा के लिए दो तिहाई सीटों पर चुनाव खत्म हो गया है. इन दोनों ही चरण के चुनाव राज्य की दशा और दिशा को तय करने वाले माने जा रहे हैं.

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323 उम्मीदवार आजमा रहे किस्मत

वहीं, अब तीसरे चरण में निचले असम वाले इलाके में चुनाव होने है, जहां की 40 सीटों पर 323 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. बीजेपी पिछले चुनाव में भी असम के निचले इलाके में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी. वहीं इस बार बीजेपी को यहां चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. यह इलाका कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल का गढ़ माना जाता है.

निचले असम में मुस्लिम मतदाता की अहम भूमिका

निचले असम में मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोकने के लिए कांग्रेस एआईयूडीएफ, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और वामदलों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी है. कांग्रेस पहले और दूसरे चरण में सीएए और चाय बागान के मजदूरों से जुडे़ हुए मुद्दो को लेकर बीजेपी को घेरने के लिए एजेंडा बनाया था.

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मुस्लिम सीटों पर मौलाना बदरुद्दीन की अच्छी पकड़ 

असम की मुस्लिम बहुल सीटों पर एआईयूडीएफ के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अच्छी पकड़ मानी जाती है. वर्ष 2011 के चुनाव में मुस्लिम बहुल 53 सीट में से कांग्रेस ने 28 और एआईयूडीएफ ने 18 सीट जीती थी, लेकिन 2016 के चुनाव में कांग्रेस को 18 और एआईयूडीएफ 12 सीटों से संतोष करना पड़ा था. इसलिए इस बार दोनों पार्टियां निचले असम में पूरी ताकत झोंक दी है. कांग्रेस, यूडीएफ और लेफ्ट पार्टियां अपना वोट एक-दूसरे को स्थानांतरित कराने में सफल रहते हैं, तो जीत की दहलीज तक पहुंचने में बहुत मुश्किल नहीं होगी.

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बीजेपी ने खेला मुस्लिम दांव
बीजेपी ने असम की सियासी जंग फतह करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकी है, क्योंकि उसे विपक्षी गठबंधन से ज्यादा खतरा महसूस हो रहा है. विपक्ष के पास मजबूत नेता भले ही ना हो लेकिन विभिन्न दलों की एकजुटता ने बीजेपी के लिए चिंता बढ़ा दी है. असम के निचले हिस्से में मुस्लिम वोटो की अहमियत को देखते हुई बीजेपी गठबंधन ने भी 9 मुस्लिम प्रत्याशी उतार रखे हैं.

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