समरकंद का वो मुगल शासक, जिसने खगोलशास्त्र में अपने इस चमत्कार से नाम कमाया

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Mughal Ruler Samarkand Earned Name Miracle Astronomy

ओलोग बेग को दुनिया एक शासक से बढ़कर खगोलशास्त्री के तौर पर याद करती है. 14वीं सदी के शायद पहले ऐसे शासक हैं, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में काफी काम किया. शिक्षा के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक लगाव के चलते दुनिया के बड़े विद्वानों के बीच उन्होंने जगह बनाई. सऊदी अरब की इमाम यूनिवर्सिटी के छात्र रहे खुर्शीद अहमद का ये लेख पढ़िए.


 

तैमूर को कौन नहीं जानता. विश्व के बड़े योद्धाओं में उनकी गिनती होती है. तैमूर अपनी राजधानी उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद से निकले. मकसद, विश्व पर विजय पाना था. अभी वह ईरान के शहर सुल्तानिया में थे कि 22 मार्च सन 1394 को उनके बेटे शाहरुख और बहू गोहर शाद के यहां बेटे का जन्म हुआ. जिसका नाम मिर्ज़ा मोहम्मद ताराजाय ( तारिक ) बेग रखा गया. दादा ने सुना बड़ी खुशी हुई.कहा कि मेरा यह पोता ओलोग बेग यानी (महान सरदार ) होगा. उसके बाद से पोता अपने दादा की दी हुई उपाधि से मशहूर हो गया.

ओलोग बेग का बचपन दादा के साथ विभिन्न देशों में गुजरा. ईरान, ईराक, तुर्की और हिंदुस्तान… जहां दादा गए. अपने परिवार को साथ में रखा जाहिर है. ओलोग बेग भी परिवार का एक हिस्सा थे.

अभी ओलोग बेग मात्र 16 वर्ष के थे. दादा का इंतकाल हो गया. पिता शाहरुख बादशाह बनें. लेकिन शाहरुख ने कुछ प्रशासनिक कारणों से अपनी राजधानी समरकंद से बदल कर हेरात शहर ( अफगानिस्तान ) में ट्रांसफर कर दी. ओलोग बेग को समरकंद का गवर्नर बना दिया. दो साल बाद उन्हें तरक्की देकर पूरे मध्य एशिया का गवर्नर बना दिया गया.

ओलोग बेग एक बड़े विद्वान थे. अरबी, फारसी, तुर्किश और मंगोलियन भाषा में माहिर थे. चीनी भाषा का भी थोड़ा इल्म हासिल कर लिया. कला औ संस्कृति से विशेष लगाव था.


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खगोलशास्त्र व गणित विशेष कर Trigonometry और spherical geometry में रुचि रखते थे. इन विषयों में किताबें भी लिखीं. इन्होंने एक साल में कितने दिन घंटे मिनट और सेकंड होते हैं, इसका सही अंदाजा लगाया, जो माडर्न साइंस से मात्र तीन सेकेंड के अंतर के साथ था.

खगोलशास्त्र में उस समय तक Ptolemy और Sufi( अब्दुर्रहमान अल सूफी ) का दबदबा था. लोग इन्हीं दोनों को पढ़ते और उनकी शिक्षा पर चर्चा करते थे. परंतु बाद में इनके साथ एक नाम और जुड़ गया. और वह था ओलोग बेग का. तारों के बारे में इनकी दी हुई जानकारी पटोलिमी और सूफ़ी से ज्यादा सटीक थी.

जब एक शासक इतना बड़ा ज्ञानी हो तो, उसका असर पूरे देश पर पड़ता है. ओलोग बेग के समय में विश्व के बड़े आलिम, शायर, कलाकार और वैज्ञानिक समरकंद में इकट्ठा हो गए थे. समरकंद को विश्व की सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा प्राप्त हो गया था.


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समरकंद में एक क्षेत्र है, जिसका नाम रेगिस्तान है. वहां इनके दादा तैमूरलंग का महल था. पास में ही इनकी दादी की बनाई हुई खूबसूरत मस्जिद थी. मस्जिद के पास ही इन्होंने एक मदरसा बनवाया था, जो उस समय में विज्ञान व गणित की शिक्षा के लिए मशहूर था. जाने माने तुर्क वैज्ञानिक अली कोशोजी भी इसी मदरसे के पढ़े हुए थे. आज भी मदरसा मौजूद है. उज़्बेकिस्तान की यात्रा करने वाले लोग उसे देखने जाते हैं.

सन 1424 से 1429 के बीच इन्होंने एक observatory बनवाई जो, उस समय में विश्व की सबसे शानदार observatory थी. जो आज मौजूद नहीं है पर उसके खंडर जरूर हैं. जिसे सोवियत यूनियन के समय बड़ी खूबसूरती से घेर दिया गया है.

ओलोग बेग के काम की सराहना पूरे विश्व ने की है. उज़्बेकिस्तान के वह हीरो हैं. साथ ही तुर्की और रूस भी उनके नाम पर डाक टिकट जारी कर चुके हैं. जर्मन खगोलशास्त्री Johann Heinnch von madler ने सन 1830 में पहली बार चांद का नक्शा तैयार किया. तो उसमें एक करेटर का नाम Ulugh Beigh crater रखा, जो खगोलशास्त्र में ओलोग बेग के कार्यों का एतराफ था.


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27 अक्तूबर 1449 को हज के सफर पर जाते हुए इनकी हत्या कर दी गई. उस समय ओलोग 55 वर्ष के थे. इनकी लाश समरकंद लाई गई. दादा तैमूरलंग की कब्र के पास ही इन्हें दफनाया गया.

(खुर्शीद अहमद, मूलरूप से यूपी के हैं. सऊदी अरब की इमाम यूनिवर्सिटी से अरबी भाषा और साहित्य में परास्नातक किया. फिलहाल अभी कतर में कार्यरत हैं.)

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