आम आदमी पार्टी हर क्षेत्र में सियासी झंडे गाड़ने का कर रही प्रयास

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दिल्ली | दिल्ली कि सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी अब दिल्ली से बढ़ने कि कोशिश कर रही है और पूरे देश में धीरे धीरे अपने पैर पसार रही है। पंजाब में मुख्य विपक्षी दल के रूप में सामने आने के बाद और कई जगहों पर उपलब्धियां हासिल करने के बाद, आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा भी लड़ने का ऐलान कर चुकी है।

आम आदमी पार्टी का स्टार चेहरा अरविंद केजरीवाल भी सियासत में काफी सक्रिय रहते हैं और केंद्र सरकार से आए दिन उलझते रहते हैं। 2019 में भारी बहुमत से जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे। चुनाव प्रचार के दौरान बिजली, पानी और शिक्षा आम आदमी पार्टी ओर अरविंद केजरीवाल का मुख्य मुद्दा रहा था जिसके चलते उनको जीत हासिल हुई थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी धीरे धीरे भारत के हर क्षेत्र में सिसायत के झंडे फैराने का प्रयास करती दिख रही है।

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आम आदमी पार्टी को बुधवार को एक बड़ा बढ़ावा मिला जब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पटियाला सांसद परनीत कौर के करीबी सहयोगी और उनके प्रचार प्रबंधक सुमेरिंदर सिंह सीरा और सुखपाल सिंह खहरा की पंजाब एकता पार्टी के फाजिल्का के जिला अध्यक्ष उपकार सिंह जाखड़ व जिला युवाध्यक्ष जशन संगीत बराड़ एवं तरनतारन के नामी शिक्षाविद जसमीत सिंह अहलूवालिया और सेवानिवृत्त बीडीपीओ राजिंदर गुप्ता, जीरकपुर ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।

पार्टी मुख्यालय में आप के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा, विधायक मंजीत सिंह बिलासपुर, राज्य महासचिव हरचंद सिंह बरसट और पार्टी प्रवक्ता गोविंदर मित्तल की उपस्थिति में ये सारे नेता पार्टी में शामिल हुए।

हरपाल सिंह चीमा ने पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि आज पंजाब के लोग अकाली और कांग्रेस जैसी लूटने वाली पार्टियों से राज्य को बचाने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2017 के चुनावों से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लोगों से वादा किया था कि वे पंजाब से माफियाओं को समाप्त कर देंगे। उन्होंने गुटका साहिब को हाथ में पकड़ कर शपथ ली थी कि वे चार सप्ताह में पंजाब से ड्रग्स को खत्म कर देंगे।

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लेकिन उनके सभी वादे झूठे निकले। उन्होंने कहा कि अकाली और कांग्रेस ने पंजाब को लूटने के अलावा कुछ नहीं किया। दिल्ली के लोगों के लिए अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा किए गए कार्यों से प्रभावित होकर पंजाब के लोगों को भी अब आम आदमी पार्टी से बहुत उम्मीदें हैं।केवल आम आदमी पार्टी ही पंजाब को प्रगति के पथ पर ले जा सकती है, इसलिए लोग पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

सूरत के निकाय चुनाव में सफलता के बाद आम आदमी पार्टी की जगी हुई उम्मीदें इस बार पंजाब ही नहीं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी गुल खिलाने की तैयारी कर रही हैं। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के फ़ार्मूले पर उत्तर प्रदेश में घुसने की तैयारी कर रहे हैं। दिल्ली में बिजली हाफ़, पानी माफ़ ने केजरीवाल को विजयी बनाया था। एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार इसी फ़ार्मूले के सहारे आप ने देश की राजधानी में अपना परचम फहराया है। लगातार तमाम राज्यों में विस्तार के लिए आतुर आप को पंजाब में तो अच्छी सफलता मिली। सत्ता के क़रीब तक पहुंची, लेकिन अन्य राज्यों में वह चारों खाने चित हो गई।

इधर, दिल्ली में भी केजरीवाल की सरकार को समस्या आने लगी तो उन्होंने इसी राज्य में फ़ोकस किया। उन्हें लगा कि नई सियासी फसल बोने के चक्कर में कहीं दिल्ली की उनकी लहलहाती सियासत को ही कोई काट न ले जाए। कुछ दिन शांति धारण करने के बाद अब आम आदमी पार्टी ने फिर से पैर पसारने की योजना बनाना शुरू किया है।

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यूपी में दिल्ली का फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में तो बिजली हाफ़, पानी माफ़ के अपने सुपरहिट फ़ार्मूले को लेकर आप संजय सिंह के नेतृत्व में उतरने जा रही है। संजय सिंह लगातार यूपी में ही ज़ोर लगाए हैं। कई प्रशासनिक अधिकारी जो हाशिये पर थे या हटा दिए गए, वो झाड़ू पर सवार होकर अपनी दमित इच्छाओं की पूर्ति का मार्ग ढूढ़ रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी के असंतुष्टों में भी सेंधमारी की कोशिशें हो रहीं हैं।

उत्तराखंड में आप को दिख रहा है भविष्य

वहीं, पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में आप बेहद आक्रामक है। पंजाब की तरह उत्तराखंड में उसे भविष्य की संभावनायें ज्यादा नज़र आ रहीं हैं। यहां पर आप ने बीजेपी की तरह दूसरे दलों के मज़बूत स्तंभों को तोड़कर लाने की बिसात बिछाई है।जिस तरह से पश्चिम बंगाल में तृणमूल के बड़े दिग्गजों को पार्टी में शामिल करा पूरी फिजां बदल दी, वैसा ही कुछ आप भी यहां करना चाहती है। आप के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक़ उत्तराखंड में तो कांग्रेस के क़रीब 40 फ़ीसद असंतुष्ट नेता पार्टी में आने को तैयार बैठे हैं। वहीं, बीजेपी में भी हाशिये पर चले गए कुछ पाकेट में प्रभाव रखने वाले नेता भी लगातार संपर्क में हैं।

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