बांग्लादेशी नौकरानी की हत्या पर सऊदी महिला को मौत की सजा

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सउदी अरब की एक आपराधिक अदालत ने बांग्लादेशी नौकरानी की हत्या के आरोप में एक सऊदी महिला को मौत की सजा सुनाई है। प्रवासी श्रमिक के मामले में नियोक्ता को इस तरह की सजा इससे पहले शायद ही कभी दी गई हो।

बंग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने सऊदी सरकार के इस दुर्लभ कदम की प्रशंसा की है। मंत्री ने सऊदी सरकार से बांग्लादेश से घरेलू कामगारों पर किए गए दुर्व्यवहार और यातना के अन्य मामलों की जांच करने का भी आग्रह किया है।

बांग्लादेश के एक अधिकारी ने बताया, आयशा अल-जजानी को रविवार को अबिरन बेगम की हत्या करने के लिए अदालत ने मौत की सजा सुनाई। बेगम की हत्या मार्च 2019 में हुई थी।


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Getty Image

सऊदी अरब में इस फैसले को लेकर तमाम लोग हैरान हैं और प्रवासी व उनके परिजनों को गम के साथ तसल्ली भी हुई है। इसकी वजह भी है, लाखों की संख्या में प्रवासियों को जानलेवा उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जान पर बन आती है तो भी कोई कुछ नहीं कर पाता और न ही एजेंसियां ध्यान देती हैं।

“मैं कई वर्षों से माइग्रेशन के फील्ड में काम कर रहा हूं, मैंने ऐसा असाधारण फैसला पहले कभी नहीं सुना,” बांग्लादेशी प्रवासी अधिकारों के कार्यक्रम प्रमुख शकीरुल इस्लाम ने कहा।

बेगम के रिश्तेदार अयूब अली ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, ” वह पैसा कमाने के लिए विदेश जाना चाहती थी ताकि अपने बुजुर्ग मां-बाप के कर्ज उतार सके।

“ जिस घर में काम मिला, वो लोग दो हफ्ते बाद ही उसे प्रताड़ित करने लगे। परदेस के जंजाल में फंसकर वह रो-रोकर हमें वापस ले जाने को बुलाती थी, हमने उसे वहां तक भिजवाने वालों से उसे वापस लाने की मिन्नतें की, लेकिन उन्होंने दुत्कार दिया”, अयूब ने कहा।

बेगम के रिश्तेदारों ने बांग्लादेशी सरकार से उन दलालों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है, जिन्होंने 40 साल की बेगम को सऊदी अरब में नौकरी देने के लिए “बरगलाया” था।

1991 से अब तक तीन लाख से ज्यादा बांग्लादेशी महिला श्रमिक सऊदी अरब गईं, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसी है जिन्होंने लौटकर दुर्व्यवहार और शोषण की अंतहीन दास्तां सुनाई।

ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के अनुसार, नियोक्ता पासपोर्ट को जब्त कर लेते हैं। इस तरह मजदूरी और प्रवासियों को उनकी इच्छा के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर करते हैं। एचआरडब्ल्यू का यह भी कहना है, जो श्रमिक तंग आकर अपने नियोक्ता को छोड़ देते हैं, उन पर “फरार” होने का आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया जाता है।

पिछले पांच सालों में सऊदी अरब में लगभग 70 बांग्लादेशी महिला श्रमिकों की मौत, जिनमें 50 से ज्यादा का आत्महत्या कर लेना, भयावहता के दिखाता है।

बांग्लादेश से बहुत बड़ी संख्या मजदूरी को दूसरे देशों में जाते हैं, जिनमें सऊदी अरब खास है। महामारी से पहले लगभग 7 लाख बांग्लादेशी हर साल नौकरी के लिए विदेश जा रहे थे।

श्रमिक अधिकारों के लिए काम करने एक्टिविस्टों का कहना है कि अक्सर  दलालों के अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए वीजा शुल्क का भुगतान किया जाता है, जो शोषण और मानव तस्करी के दरवाजे खोलता है।

Source- Aljazeera


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