सिर्फ 36 फीसद भारतीय अमेरिकियों की नजर में ‘भारत सही रास्ते पर’: सर्वे

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संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रॉक स्टार की तरह की रैलियों में उमड़े भारतीय अमेरिकियों को अब भारत के विकास की राह दुरुस्त नहीं लग रही। यह बात मंगलवार को जारी हुए ताजा सर्वेक्षण के नतीजों से जाहिर हुई।

मोदी की राष्ट्रवादी छवि ने अमेरिका और अन्य जगहों पर भारतीय प्रवासियों उत्साह बढ़ाया, उन्हें मेजबान देशों में भारत के हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़े आधार के रूप में देखा।

कार्नेगी एंडोमेंट द्वारा इंटरनेशनल पीस, पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय और जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस इंटरनेशनल स्टडीज की ओर भारतीय अमेरिकियों के सर्वेक्षण के अनुसारए केवल 36 प्रतिशत भारतीय अमेरिकियों का मानना ​​है कि भारत सही रास्ते पर है, जबकि 39 प्रतिशत को लगता है कि ऐसा नहीं है।

पांच में एक मत ऐसा भी रहा, जिसने कोई राय नहीं दी। यह सर्वेक्षण 1 सितंबर से 20 सितंबर, 2020 के बीच रिसर्च एंड एनालिटिक्स फर्म YouGov की साझेदारी में किया गया था।

लेखक सुमित्रा बद्रीनाथन, देवेश कपूर और मिलन वैष्णव ने सर्वेक्षण परिणामों के आकलन में कहा, ” भारतीय अमेरिकियों का एक अहम अल्पसंख्यक हिस्सा भारत में राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों से जुड़ाव रखता है।”


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मोदी की सरकार, जो 2014 में पहली बार भारत को एक राजनीतिक और आर्थिक शक्ति में बदलने का वादा करके बनी थी, को भारत में हिंदुत्ववाद को बढ़ावा देने और असंतोष दबाने की कोशिश पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

कृषि क्षेत्र में मुक्त बाजार सुधारों के खिलाफ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों द्वारा जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन ने मोदी सरकार को फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है, जिसमें पॉप स्टार रिहन्ना से लेकर क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग के किसानों को समर्थन भी शामिल है।


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सर्वेक्षण में पाया गया कि 18 प्रतिशत भारतीय अमेरिकियों ने सरकारी भ्रष्टाचार को भारत की सबसे बड़ी चुनौती माना, इसके बाद 15 प्रतिशत ने अर्थव्यवस्था को चिंताजनक माना और 10 प्रतिशत ने देश की सबसे महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में धार्मिक आजादी का हवाला दिया।


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भारतीय अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समूह है। इनमें से बड़ी संख्या 2019 में ह्यूस्टन, टेक्सास में धमाकेदार “हाउडी मोदी” रैली में शामिल हुई, जिसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भाग लिया था। प्रधानमंत्री मोदी का ”अबकी बार ट्रंप सरकार” कहना आज तक चर्चा में है।

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