मुंबई में मुस्लिम धर्मगुरु-बुद्धिजीवियों की मीटिंग, कम्युनिटी को टारगेट करने के ख़िलाफ आंदोलन का फ़ैसला

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Muslim Religious Leaders Meeting
मुंबई में मुस्लिम धर्मगुरु और बुद्धिजीवियों की आज के माहौल को लेकर मीटिंग.

द लीडर : भारत के मुसलमान एक ऐसे दोराहे पर आकर खड़े हो गए हैं, जहां जान-माल और इज्ज़त का ख़तरा बढ़ता जा रहा है. हाल के दिनों में जिस तरह से नफ़रत का बवंडर उठा है, उसमें इस ख़तरे की आहट महसूस होने लगी है. सेक्युलर पार्टियों ने मुसलमानों को ख़ूब छला और उन्हें राजनीतिक टूल के तौर पर इस्तेमाल किया. मुसलमानों का सम्मान कैसे बरक़रार रहे और उनकी जान-माल की हिफ़ाजत हो, ये फ़िक्र आम लोगों के साथ टॉप मुस्लिम लीडरशिप को भी बेचैन करने लगी है. (Muslim Religious Leaders Meeting)

मुंबई के उस मीटिंग में भी इसकी झलक नज़र आई, जहां सभी फ़िरकों से चोटी के नेता शामिल हुए. बैठक में ये तस्लीम कर लिया गया है कि भारत में मुसलमानों को जनसंहार और लोकतंत्र के ख़ात्मे का वातावरण बनाया जा रहा है. ये बड़ा ख़तरा और चैलेंज है. जिसके ख़िलाफ ज़मीनी संघर्ष की ज़रूरत है.

मीटिंग में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना सज्जाद नोमानी, पूर्व सांसद मुहम्मद अदीब, दरगाह अजमेर शरीफ से सैयद सरवर चिश्ती, महाराष्ट्र सपा के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी, शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के ज़हीर अब्बासा, कोलकाता से शफीक क़ासमी, डॉ. आसमा ज़हरा, महिला एक्टिविस्ट सुमैया नोमानी, रहमानी 30 से फहाद रहमानी और दूसरे तमाम नेता, बुद्धिजीवी शामिल हुए. (Muslim Religious Leaders Meeting)


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इससे पहले जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से दिल्ली में एक भव्य ईद मिलन समारोह आयोजित किया गया था. जिसमें देश के दिग्गज नेता और सभी फिरकों से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम नेता, भाजपा समेत दूसरे दलों के वरिष्ठ लीडर शामिल हुए थे.

मुंबई की मीटिंग को लेकर मौलाना सज्जाद नोमानी ने कहा कि, हमारे सामने बड़ा चैलेंज है. जिसके लिए गांव स्तर तक विरोध मूवमेंट चलाने की ज़रूरत है. एक मंच बन रहा है. (Muslim Religious Leaders Meeting)

हाल के दिनों में बुल्डोज़र पॉलिटिक्स सबसे बड़ी चिंता के रूप में सामने आया है. जिसमें छोटे-मोटे आरोपों में लोगों की संपत्तियां नष्ट की जा रही हैं. सज्जाद नोमानी ने कहा कि बुल्डोज़र के ख़िलाफ मुसलमानों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए. क्योंकि ये किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा.

हाल के दिनों में देखें तो देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई धर्म संसद और महापंचायतें हुई हैं, जिनसे मुसलमानों के सामूहिक नरंसहार या उन्हें मिटाने की बातें सामने आई हैं. लिंचिंग, महिलाओं की आबरू की धमकियां सामने आई हैं. और इसी रमज़ान महीने में मस्जिदों में भगवा झंडा लहराने और उसके बाद हिंसा में मुसलमानों के ख़िलाफ पुलिस की कार्रवाईयों ने कम्युनिटी में चिंता पैदा कर दी है.

मुंबई में मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक में ऐसे हर एक बिंदु पर चर्चा हुई है, जो मुसलमानों के लिए संकट बन रही हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में एकमत से ये फ़ैसला लिया गया है कि इस नाइंसाफी के ख़िलाफ डटकर खड़े होने की ज़रूरत है. (Muslim Religious Leaders Meeting)


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