द लीडर। जहां केंद्र और प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कई करोड़ों रुपए हर वर्ष पानी के तहत बहा रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से शिक्षा व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं बस्ती जिले में, जहां 11 साल का दिव्यांग बच्चा प्रार्थना पत्र लिए तहसील दिवस में पहुंचा जिसे देखकर जिले के आला अधिकारी दंग रह गए, इस छोटे बच्चे ने जिला अधिकारी बस्ती को शिकायती पत्र दिया। और कहा कि, मैं विकलांग हूं इसलिए सरस्वती शिशु मंदिर रामबाग में मेरा एडमिशन नहीं किया जा रहा है।
दिव्यांग होने के कारण नहीं मिल रहा एडमिशन
बच्चे ने बताया कि, अध्यापकों द्वारा यह कहा जा रहा है कि, वह दिव्यांग है इसलिए उसका एडमिशन नहीं होगा। जबकि शासन का निर्देश है, प्राइवेट विद्यालयों या सरकारी गरीब और दिव्यांग बच्चों को प्राथमिकता के तहत उनको शिक्षा दिया जाए, लेकिन शिक्षा अधिकारियों की कमी की वजह से इस दिव्यांग बच्चा जो पढ़ना चाह रहा है, उसका स्कूलों में दिव्यांग होने के कारण दाखिला नहीं हो पा रहा है। जो पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहा है।

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जहां प्रदेश और केंद्र सरकार यह दावा करती हैं कि, गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूलों में फ्री व्यवस्था की गई है। वहीं प्रदेश की सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में लगभग 25 परसेंट गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। ऐसे में यह दिव्यांग बच्चा जो पढ़ना चाहता है, तो क्यों नहीं इसका स्कूल में एडमिशन हो रहा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दिए निर्देश
11 वर्षीय छात्र शुभम ने बताया कि, मेरा घर पिपरा गौतम में है। मैं कक्षा 6 में एडमिशन करवाना चाह रहा हूं, लेकिन मेरा एडमिशन नहीं हो रहा है। वहीं इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हैं जिला अधिकारी बस्ती सौम्या अग्रवाल ने सख्त निर्देश देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बस्ती को कहा कि, तत्काल एडमिशन कराया जाए। अगर इसमें अध्यापक या स्कूल प्रबंधक दोषी हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बता दें कि, आज बस्ती जिले में संपूर्ण समाधान दिवस में 98 शिकायती प्रार्थना पत्र मिले। जिसमें से ज्यादातर शिकायतों में जमीनी विवाद का मामला सामने आया है। वहीं 30 मामलों का तत्काल निस्तारण करा दिया गया। इस संबंध में जिला अधिकारी बस्ती सौम्या अग्रवाल ने बताया कि, संपूर्ण समाधान दिवस में 98 मामले आए थे, कई मामलों का निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। साथ ही बाकी मामलों के निस्तारण के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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