आला हजरत का पूरा घराना उर्से रजवी के एक मंच पर नजर आए, कोशिशें तेज

Urse Razvi Ala Hazrat

द लीडर : उर्से रजवी के प्रमुख मंच पर आला हजरत का पूरा घराना हाजिर रहे. एक लंबे अरसे के बाद ये खूबसूरत कोशिश हुई है. इसके केंद्र में आला हजरत परिवार के दो दामाद हैं. सय्यद आसिफ मियां और सलमान हसन. आसिफ मियां उर्स प्रभारी हैं-और दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां के दामाद भी. सलमान हसन जमात रजा-ए-मुस्तफा के उपाध्यक्ष व मदरसा जामियातुर्रजा में आयोजित उर्से रजवी के प्रभारी हैं और दरगाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन मुफ्ती असजद मियां के दामाद. (Urse Razvi Ala Hazrat)

आसिफ मियां मथुरापुर स्थित मदरसा जामियातुर्रजा पहुंचे. जहां उर्से रजवी का दूसरा मंच सजा है. सलमान हसन से मुलाकात की. आमतौर पर दरगाह के बुजुर्ग एक-दूसरे के मंच पर हाजिर नहीं हो पाते हैं. लेकिन इस बार ये पहल हुई है. पैगाम आसिफ मियां लेकर गए. इससे जुड़ी एक तस्वीर भी सामने आई है. जिसमें सलमान हसन खां इस्लामियां इंटर कॉलेज मैदान पहुंचे. उर्स के इंतजामों को लेकर आसिफ मियां की तारीफ की.

एक दूसरी तस्वीर, जो पहले सामने आई थी. जिसमें सलमान हसन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने गए थे. इस मुलाकात को लेकर आला हजरत घराने से सवाल उठे थे. विवाद भी हुआ. लेकिन एका के लक्ष्य में वो सरी बातें पीछे छूट गईं. और ये कोशिश काबिले-तारीफ मानी जा रही है.


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इमाम अहमद रजा खां-आला हजरत का तीन रोजा उर्से रजवी 2 अक्टूबर से शुरू हो चुका है, जोकि शानो-शौकत के साथ मनाया जा रहा है. सोमवार को 2:38 बजे कुल होगा. इसमें शामिल होने के लिए शनिवार को ही बेशुमार अकीदतमंदों का हुजूम बरेली पहुंचता जा रहा है. दरगाह परिसर, इस्लामियां इंटर कॉलेज मैदान से लेकर मदरसा जामियातुर्रजा तक, जायरीन ही जायरीन नजर आ रहे हैं. (Urse Razvi Ala Hazrat)

खानकाहों और दरगाहों की चादर पहुंचने का भी सिलसिला जारी है. राजनीतिक दलों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख की चादर पहुंच रही है. कलियर शरीफ की दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन अलीशाह मियां की तरफ से इमरान कुरैशी चादर लेकर हाजिर हुए हैं. जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरी की ओर से आप के संस्थापक सदस्य रईस सिद्​दीकी चादर लेकर आए हैं.

उर्स के दूसरे दिन जायरीन की भीड़ जुटने को लेकर पुलिस-प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने में जुटा है. खासतौर से सोमवार के कुल को ध्यान में रखकर. इसलिए, क्योंकि 2 और 3 अक्टूबर को जिस तरह से जायरीन भी भीड़ बनी है. उससे कुल में बड़ी भीड़ की संभावना बनी है. तब, जब जिला प्रशासन और दरगाह इंतजामियां की ओर से जायरीन से घरों पर ही उर्स मनाने की गुजारिश की जा चुकी है. (Urse Razvi Ala Hazrat)

 

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