World Nature Conservation Day: जंगल हैं, तालाब-नदियां न पक्षियों का शोर, हर साल बढ़ता प्रकृति के संरक्षण का जोर

द लीडर : आलीशान इमारतें हैं. बिजली, इंटरनेट, सड़कों का जाल और कारखानें. धन-दौलत, रुतबा. सब तो हैं. जो इंसान को चाहिए. लेकिन जंगल कहां हैं, तालाब और नदियां? पेड़ों की फिक्र किसे. याद भी है कि कब कोई पौधा लगाया था. क्या वो वृक्ष बना? या मुरझाकर खत्म हो गया? आंगन में गौरैया आती है. भोर में पक्षियों की चहचहाहट सुनते हैं. अगर हां, तो यकीनन आप प्रकृति के संरक्षक हैं. कुदरत की नेयमतों की कद्र करने वाले. वरना हर साल 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के फोटो सेशन में शामिल होने वाले के सिवाय कुछ भी नहीं. (World Nature Conservation Day)

याद रखिएगा कि जल-जंगल और जमीन की अनदेखी नई नस्लों पर भारी पड़ने वाली है. विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की पूर्व संध्या पर बरेली कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना-इकाई प्रथम और उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी, उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में वेबिनार हुआ. विषय रहा “घर- परिसर में पक्षी”.

बरेली में काटे जा रहे पेड़. फोटो साभार डॉ. प्रदीप कुमार जागर.

मुख्य अतिथि राज्य उच्च शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा-”आज इंसान ये मानने लगा है कि भूमि उपभोग के लिए है. और वो उपभोक्ता. इसलिए वो कुदरत के सभी संघटकों के साथ छेड़छाड़ कर रहा है. जिससे वो नष्ट होते जा रहे हैं.” (World Nature Conservation Day)


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सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्रकृति विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंची शिरीष एस ने कहा-”मनुष्य और पक्षी सीधे एक-दूसरे से जुड़े हैं. इंसान ने जाने-अनजाने में पक्षियों की न जाने कितनी ही प्रजातियां खत्म कर डालीं.”

”प्रकृति से जुड़ना है. तो घर-कॉलोनी, गांव-शहर में फिर से प्राकृतिक वातावरण बनाना होगा. फलदार पौधे लगाएं. वो वृक्ष बनें. ये सुनिश्चित करें. ये पक्षियों का बसेरा, भोजन का साधन, दोनों होते हैं. तालाब-नदियों को संवारें. वहां भी पौधरोपण करें. ऐसे स्थानों पर पक्षी प्रजनन करते हैं.”

शहरी क्षेत्रों को हरित क्षेत्र में बदलने की जरूरत जताई. बोले-सब्जी के बगीचों में रसायन का इस्तेमाल बंद करें. कीड़े-मकोड़े, पक्षियों का भोजन होते हैं. ज्यादा रसायन के उपयोग से कीड़े नष्ट हो जाते. और पक्षियों के सामने खाने का संकट पैदा होता जा रहा है. (World Nature Conservation Day)

बेहतर हो कि औषधीय पौधे लगाएं. इससे आपको तो लाभ होगा ही. पक्षियों को फल-फूल मिलेंगे. तितली-भंवरे आएंगे. एक तरीके से पक्षी आधारित वृक्षारोपण करना होगा. कृतिम घर बनाए जा सकते हैं. इसके लिए लोगों को जागरुक करना जरूरी है.


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बरेली कॉलेज ने एक अच्छी कोशिश की है. बशर्ते ईमानदारी के साथ ये संकल्प निभाया जाए. एमजेपी यूनिवर्सिटी भी अपने छात्रों को इससे जोड़ सकती है. रुहेलखंड में उसके करीब 5 लाख छात्र हैं. इस इलाके में तो बदलाव की कोशिश रंग ला ही सकती है. (World Nature Conservation Day)

फोटो साभार डॉ. प्रदीप कुमार जागर.

बहरहाल, प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने वेबिनार से जुड़ने वाले अतिथियों का स्वागत किया. संचालन एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के एनएसएस समन्वयक डॉ. सोमपाल सिंह ने किया. छात्रों को प्रकृति-पक्षी संरक्षण की शपथ दिलाई.

सेसायटी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. उमराव, पुनीत यादव संचालन में रहे. एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी और रसायन शास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर राजीव यादव ने बताया कि ई-संगोष्ठी में 10 राज्यों से व यूपी के 62 जिलों के प्रोफेसर, एनएसएस समन्वयक और स्वयंसेवक जुड़े. (World Nature Conservation Day)

एक तरफ बरेली कॉलेज प्रकृति के संरक्षण की अलख जगाने की कोशिश में लगा है. उसी वक्त बरेली में पेड़ काटे जा रहे हैं. जिसका मुद्​दा भी बरेली कॉलेज की एक एसोसिएट प्रोफेसर प्रदीप कुमार जागर ने उठाया है. डीएफओ से बात की.

करीब 789 पेड़ काटे जाने हैं. जो बस अड्डा निर्माण की भेंट चढ़ेंगे. इनके ट्रांसलोकेट पर 74 लाख खर्च आएगा. पेड़ों को बचाने के लिए डॉ. जागर बुधवार को डीएम से मिलेंगे. उनके अलावा कम ही ऐसे लोग हैं, जिन्हें हरियाली खत्म होने को लेकर इस हद तक फिक्र हो कि वे उन्हें बचाने की कोशिश में जुट जाएं.

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