कथित यौन उत्पीड़न में घिरे मंत्री के इस्तीफे के बाद कर्नाटक के छह मंत्रियों के खिलाफ समाचार प्रकाशन पर रोक से सवालों की झड़ी

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Karnataka Minister Sexual harassment Resignation
मंत्रीपद से इस्तीफा देने वाले रमेश जारकिहोली, फोटो साभार-सोशल मीडिया.

बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा सरकार के छह मंत्रियों को फौरीतौर पर अदालत से सुरक्षा कवच मिल गया है. अदालत ने अपने आदेश में 68 मीडिया हाउस से कहा है कि इनके खिलाफ कोई भी अनवैरिफाइड समाचार प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेंगे. कर्नाटक सरकार में मंत्री रहे रमेश जारकिहोली की कथित सेक्स वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया था. उसी क्रम में इन मंत्रियों ने अपने खिलाफ असत्यापित समाचार सामग्री प्रकाशित करने पर रोक के लिए कोर्ट का रुख किया था. (Karnataka Minister Sexual harassment Resignation )

जिन मंत्रियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उनमें, राज्य के श्रम मंत्री शिवराम हेबर, कृषि मंत्री बीसी पाटिल, सहकारिता मंत्री एसटी सोमशेखर, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुधाकर, युवा सशक्तिकरण एवं खेल मंत्री केसी नारायाण गौड़ा और शहरी विकास मंत्री भयारथी बासवराज शामिल हैं. मंत्रियों की संयुक्त याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था.


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कर्नाटक सरकार के ये छह मंत्री, उन 17 बागी विधायकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने काग्रेस और जद-एस गठबंधन के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी. और इनके इस्तीफा देने से 2019 में राज्य की सरकार गिर गई थी. बाद में ये भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़क येदियुरप्पा सरकार में मंत्री बने थे.

हाल ही में रमेश जारकिहोली की एक कथित वीडियो क्लिप सामने आई थी, जिसमें वह कथित रूप से आपत्तिजनक हालत में देखे जा रहे थे. इसको लेकर राज्य की सियासत में भूचाल खड़ा हो गया. कुछ और लोगों की भी ऐसी क्लिप सामने आने की बातें उठने लगीं. काफी हल्ला मचने पर यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे जारकिहोली ने इस्तीफा दे दिया था.


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इसके बाद भी ये मामला नहीं थमा. चूंकि जिन मंत्रियों ने कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने ये आशंका जताई है कि राजनीतिक साजिश में उन्हें बदनाम करने की कोशिशें चल रही हैं. इससे बचाव के लिए उन्होंने कोर्ट का रुख किया है.

इसको लेकर कांग्रेस येदियुरप्पा सरकार के खिलाफ आक्रामक है. कांग्रेस नेताओं ने आह्वान किया है कि ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार आवाज उठानी है. और इनकी सच्चाई सभी के सामने लानी है.

 

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