सुप्रीमकोर्ट : सरकार से अलग राय रखना देशद्रोह नहीं, याचिका खारिज कर 50 हजार का जुर्माना लगाया

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द लीडर : सुप्रीमकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ दायर एक याचिका पर कहा कि ‘सरकार के विपरीत विचार रखना देशद्रोह नहीं है.’ शीर्ष अदालत ने रजत शर्मा और डा. नेह श्रीवास्तव की याचिका खारिज कर दी है. और उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. इसलिए क्योंकि याची अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहे. (Supreme Court Government Treason Petition)

याचिकाकर्ताओं ने पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला द्वारा दिए गए एक लाइव बयान को लेकर याचिका दायर की थी. जिसमें दावा किया था कि अनुच्छेद-370 हटाए जाने पर अब्दुल्ला ने कहा था कि इसकी बहाली के लिए चीन की मदद लेंगे.

याचि‍का में ये भी आरोप लगाया था कि वह कश्मीर को चीन के हवाले करने की कोशिश कर रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने अब्दुल्ला के खिलाफ आइपीसी की धारा-124-ए के तहत कार्रवाई करने और उनकी संसद सदस्यता खत्म करने की मांग की थी.


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बुधवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने इस मामले को सुना और याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने एक बार फिर बेहद अहम टिप्पणी की है कि सरकार से जुदा मत रखना, देशद्रोह के दायरे में नहीं आता है.

5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 समाप्त कर दिया था. इसके बाद घाटी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था. जिसमें पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत अन्य नेता, एक्टिविस्ट शामिल थे. 13 मार्च 2020 को फारूक अब्दुल्ला का हिरासती आदेश रद हुआ था. इसके बाद से वे जम्मू-कश्मीर का पुराना दर्जा बहाली की मांग उठा रहे हैं.

पिछले दिनों संसद में बजट सत्र के दौरान भी फारूक अब्दुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर में धारा-370 बहाली की मांग दोहराई थी. वहीं, धारा-370 हटाने की वैधानिकता से जुड़ी एक याचिका सुप्रीमकोर्ट में पहले से दायर है.


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