ब्रिगेड परेड ग्राउंड जिसका, बंगाल भी उसका, इसी मैदान में पीएम मोदी की इस दिन रैली

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कोलकाता। कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड आज से ही इतिहास के पन्नों में दर्ज वह मैदान है जो आज भी राजनीति का रण बना हुआ है। इस मैदान में कभी प्लासी का युद्ध हुआ था। राजनीति में कहा जाता है कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड जिसका बंगाल भी उसका। 2019 लोकसभा का चुनाव भी इस मैदान का गवाह रहा है। पीएम मोदी 7 मार्च को एक बार फिर से इस मैदान में जनता को संबोधित करने जा रहे हैं, जिससे बंगाल में पार्टी का भविष्य तय होने का अनुमान है, लेकिन उससे पहले रूबरू होते हैं उस ब्रिगेड परेड ग्राउंड से, जो बंग, बांग्ला और बंगाल की पहचान बन चुका है।

पीएम मोदी से पहले कांग्रेस ने दिखाई ताकत

इस मैदान में पीएम मोदी से पहले कांग्रेस और वामपंथी दल का गठबंधन 28 फरवरी को जनसभा कर चुका है। अब 7 मार्च को पीएम मोदी के साथ दिग्गज नेता मिथुन चक्रवर्ती और बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली भी साथ में नजर आएंगे। अहम बात यह कि बंगाल में 50 फीसद आबादी मुस्लिम है जो भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है।

मैदान का इतिहास

साल 1919 में इस मैदान में पहली रैली हुई थी। कोलकाता में बने ब्रिगेड परेड ग्राउंड ने पहली रैली का स्वाद आजादी से पहले ही ले लिया था। उस दौरान चितरंजन दास और अन्य स्वतंत्रता सेनानी रोलेट एक्ट के विरोध में इस मैदान में जुटे और ऑक्टरलोनी स्मारक के पास बैठक की। ऑक्टरलोनी स्मारक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के कमांडर सर डेविड ऑक्टरलोनी के याद में बनवाया गया था। अब इस स्मारक को शहीद मीनार कहा जाता है।

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ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक इस्तेमाल

बता दें कि इस मैदान का राजनीतिक इस्तेमाल सबसे पहले वामपंथी दलों ने पहचाना। उन्होंने साल 1955 में 29 जनवरी के दिन इस मैदान पर सोवियत प्रीमियर निकोल एलेक्जेंड्रोविच और सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के पहले सचिव ख्रु्श्चेव का स्वागत किया। उस दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधान चंद्र रॉय ने उन्हें आमंत्रित किया था।

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अंग्रेजों ने बनाया था यह मैदान

इस मैदान की कहानी काफी पुरानी है इस ग्राउंड की नीव साल 1857 में पड़ी थी। उस दौरान अंग्रेजों ने प्लासी का युद्ध जीता  और बंगाल के मालिक बन गए। इसके बाद यहां पर अंग्रेजों ने इंग्लैंड के तीसरे किंग विलियम के नाम पर एक महल बनाया। इसर किले में पूरी अंग्रेजी फौज रहती थी। इस किले के ठीक सामने सैनिकों के लिए एक मैदान तैयार किया गया, जिसका नाम रखा गया ब्रिगेड परेड ग्राउंड ।

 

 

 

 

 

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