नाइंसाफी की लड़ाई में सबसे आगे रहे हैं स्टूडेंट्स, लेकिन कुछ दशकों में छात्र बिरादरी से कोई बड़ा नेता नहीं निकला-CJI

द लीडर : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने कहा कि, नाइंसाफी की लड़ाई में छात्र हमेशा फ्रंटफुट पर रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ दशक गवाह हैं कि छात्र बिरादरी से कोई बड़ा नेता नहीं निकला है. स्टूडेंट्स जब सामाजिक और राजनीतिक तौर पर जागरुक होते हैं, तो रोटी-कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसे बुनियादी मुद्​दों को वे राष्ट्रीय डिस्कोर्स में लेकर आते हैं. (CJI Students Leader Injustice)

दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआइ ने ये बातें कहीं हैं. उन्होंने कहा कि, नेकदिल, दूरदर्शी और ईमानदार स्टूडेंट्स सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करें. क्योंकि जिम्मेदार नौजवान लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

चीफ जस्टिस ने ये ख्वाहिश जाहिर की है कि मौजूदा वक्त की जो बहसें हैं, छात्रों को उनमें बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए. अपना विजन एकदम साफ रखें. ताकि वे भविष्य में एक अच्छे नेता तौर पर उभर सकें. (CJI Students Leader Injustice)


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सीजेआइ ने कहा कि स्टूडेंट्स हमारे समाज का अनिवार्य हिस्सा हैं. इस बात पर जोर दिया कि वे एकांतवास में नहीं रह सकते. स्टूडेंट्स स्वतंत्रा, न्याय, समानता और मौलिकता के अभिभावक हैं. लेकिन ये सब तभी हासिल किया जा सकता है, जब उनकी एनर्जी का सही इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने कहा कि नौजवानों में आदर्शवाद और महत्वाकांक्षा का सही संयोजन देश को सबसे शक्तिशाली राष्ट्रों के तौर पर आगे बढ़ने में मदद करेगा.

चीफ जस्टिस ने लॉ ग्रैजुएट्स को कानूनी पेशे का बुनियादी सबक दिया. इसके लिए न्यायमूर्ति एमसी छागला का एक उद्धरण साझा करते हुए कहा कि, “कानूनी पेशा, एक महान पेशा है. ये कोई व्यापार या व्यवसाय नहीं है. दोनों के बीच का अंतर गहरा और मौलिक है. व्यापार में, आपका एकमात्र मकसद, पैसा कमाना है. कानूनी पेशे में, पैसा कमाना केवल आक्समिक है.” (CJI Students Leader Injustice)

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर कहा कि, इन विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र कॉरपोरेट लॉ फर्मों में काम करते हैं. ये समझाते हुए कि शायद यही वजह है कि एनएलयू को अभिजात्य के तौर पर देखा जाता है.

सीजेआइ ने भावी वकीलों को कानूनी प्रैक्टिस का पता लगाने के लिए भी मोटिवेट किया. ये समझाते हुए कि इससे उन्हें अपना समय और प्रयास उन कारणों पर खर्च करने और तमाम सामाजिक मुद्दों से संबंधित लड़ाई को अदालत में लड़ने का मौका मिलेगा. (CJI Students Leader Injustice)

 

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