उत्तराखंड से फिर चौंकाने वाली खबर, वक्त से पहले खिल गए ये फूल

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मनमीत

ग्लोबल वार्मिंग के कारण न केवल हिमालयी राज्यों में ग्लेशियर मानवजीवन के लिए खतरनाक बनते जा रहे हैं, वहीं अब वनस्पति भी आश्चर्य में डाल रही है। उत्तराखंड में बसंत आने पर जो फूल मार्च मध्य में सुर्ख लाल खिलता था, वो अब जनवरी में ही खिल जा रहा है।

इसी तरह अखरोट के पेड़ में फूल मार्च मध्य के बाद आते हैं लेकिन इस बार ये जनवरी में ही आ गए। विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी मार्च में इन वनस्पति को मिलती थी, वो जनवरी में ही मिल जा रही है। लिहाजा, उच्च हिमालय के साथ ही मध्य हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी परिघटनाएं होने लगी हैं।

बुरांस हिमालयी क्षेत्रों में 1500 से 3600 मीटर की मध्यम ऊंचाई पर मिलने वाला सदाबहार वृक्ष है। बुरांश के पेड़ों पर मार्च-अप्रैल माह में लाल सुर्ख रंग के फूल खिलते हैं। बुरांस के फूलों का इस्तेमाल दवाइयों में किया जाता है। इसका शरबत खूब पसंद किया जाता है। जो दिल के मरीजों के लिये बहुत फायदेमंद होता है।

वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों को यथावत रखने में बुरांस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले कुछ सालों में बुरांस के फूलों में उतना सूर्ख लाल नहीं हो रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1500 से 2000 मीटर की ऊंचाई में पाए जाना वाले बुरांस को उस हद तक मौसम नहीं मिल रहा था, जिससे वो स्वस्थ्य रह पाता। लेकिन इस बार जनवरी में ही राज्य के कई इलाकों में बुरांश खिल गया। जो चिंता का विषय है।


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मुख्य उद्यान अधिकारी मीनाक्षी जोशी बताती हैं कि ये सब ग्लोबम वार्मिंग के कारण हो रहा है। बुरांश ही नहीं, बल्कि इस बार देखा जा रहा है कि आम का बौर अमूमन फरवरी मध्य में आता है, लेकिन इस बार कई मैदानी इलाकों में ये दिसंबर में ही आ गया। ऐसा वक्त से पहले गर्मी मिलने के कारण हुआ है।

सफेद और नीले बुरांस भी हैं उत्तराखंड में

कुमाऊंनी, जौनसारी और गढ़वाली लोकगीतों में बुरांस वर्तमान में उत्तराखंड का राज्य वृक्ष भी है। उत्तराखंड के साथ ही पड़ोसी राज्य हिमाचल, सुदूर पूर्वोत्तर के सिक्किम और पड़ोसी देश नेपाल में भी बुरांस पाया जाता है। नेपाल में बुरांश राष्ट्र वृक्ष है। सिक्किम में बुरांस की सर्वाधिक 45 से 50 प्रजातियां पाई जाती हैं।

बुरांस का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन है। उत्तराखंड में सबसे ऊंचाई में बुरांश की जो प्रजाति पाई जाती है उसको वैज्ञानिक रोडोडेंड्रोन कंपैनुलेडम कहते हैं। यह दस से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर पाई जाती है। इसे टिंबर लाइन भी कहा जाता है। यह टिंबर लाइन और अल्पाइन (बुग्याल) के बीच सेतु का काम भी करती है। इसका वृक्ष नहीं होता, बल्कि यह प्रजाति झाड़ी के रूप में होती है। इसके फूल हल्के सफेद और नीले होते हैं।

बुरांस के जूस के फायदे

-विशेषज्ञों की मानें तो बुरांस का जूस हृदय संबंधी बीमारियों से बचाता है.

-खून की कमी को दूर करता है.

-शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है.

-उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर में काफी लाभदायक होता है.

-लीवर संबंधी बीमारियों को दूर करता है.

-बुरांस एंटी ऑक्सीडेंट की पूर्ति भी करता है.


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