वैलेंटाइन डे पर जानिए, कैसे ‘लव जिहाद’ के बहाने मर्दों को मनमानी का नया मौका मिल गया

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अरसे से ‘लव जिहाद’ शब्द प्रचारित है। मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन चुका है। यह शब्द आया कहां से! जिसको लेकर सत्ता से लेकर विपक्ष ही नहीं, हर धर्म के लोग, खासतौर पर मर्द, सही-गलत का फैसला लेने की जगह महिलाओं के वजूद को कुचलने पर आमादा हो गए हैं।

यह शब्द दरअसल किसी भी धार्मिक ग्रंथ या उपदेश का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इन्हें गढ़ा गया, निश्चय ही खास मकसद के लिए।

‘मुक्ति संग्राम’ पत्रिका के दिसंबर 2020 के अंक में इस सिलसिले में एक लेख प्रकाशित हुआ है। लेख के अनुसार, एक राजनीतिक विचार के रूप में ‘लव जिहाद’ का प्रचार सबसे पहले कर्नाटक के इलाक़े दक्षिण कन्नड़ में शुरू हुआ। जिसे सबसे पहले इस इलाक़े में सक्रिय कट्टर हिंदुत्ववादी संगठन ‘हिंदू जन-जागृति समिति’ द्वारा प्रचारित किया गया था।


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पड़ताल यह भी बताती है कि यह ‘लव जिहाद’ का शुरुआती प्रचारक संगठन वही है, जो 2009 के गोवा बम धमाकों में नामज़द है। यही नहीं, इसी संगठन पर वरिष्ठ बुद्धिजीवी गोविंद पानसारे, सामाजिक कार्यकर्ता और तर्कशील डॉ.नरेंद्र डाभोलकर, एमएस कुलबर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश के क़त्ल के आरोप भी हैं।

बताया जाता है कि 2007 में इस संगठन के नेताओं द्वारा लव जिहाद का प्रचार जोर-शोर से शुरू किया गया। प्रचार में कहा गया, “मुस्लिम नौजवानों द्वारा हिंदू लड़कियों को “प्यार में फंसाकर” उनका धर्म परिवर्तन किया जाता है और इस काम के लिए उन्हें विदेशों से इस्लामिक संगठनों द्वारा पैसे मिलते हैं।

प्रचार में यह दावा किया गया, ”यह एक इस्लामिक एजेंडे के तहत किया जा रहा है, जिसका मक़सद हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाना और भारत में मुस्लिम आबादी को बढ़ाना है”।

बिना किसी सबूत के इस संगठन ने यह प्रचार किया कि कर्नाटक में 30 हजार हिंदू औरतों का धर्म “इस्लामिक एजेंडे” के तहत बदला जा चुका है।

साल 2009 में कर्नाटक के उच्च न्यायालय में एक मामला आया, जिसमें एक परिवार द्वारा उनकी लड़की का एक मुस्लिम द्वारा विवाह के ज़रिए धर्म परिवर्तन करने का दावा किया गया, लेकिन उस लड़की ने यह बयान दिया कि उसने अपनी मर्ज़ी से विवाह किया है और अपनी इच्छा से ही इस्लाम धर्म को अपनाया है।


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फिर भी अदालत ने लड़की को जांच होने तक उसके परिवार के साथ रहने के लिए कहा। अदालत ने इस प्रकरण के साथ कर्नाटक में गुमशुदा औरतों के मामले से जोड़कर जांच के आदेश दे दिए।

केरल पुलिस ने ‘लव जिहाद’ के मामलों की जांच की, लेकिन उसे इसमें कोई सच्चाई नज़र नहीं आई। बाद में उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि अंतर-धार्मिक विवाह आम बात है और इसे अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, फिर यह जांच बंद कर दी गई।

इसके बाद 2014 के चुनावों से कुछ पहले ही बड़े स्तर पर ‘लव जिहाद’ का प्रचार किया गया। सोशल मीडिया में ‘लव जिहाद’ की अफ़वाहें बड़े स्तर पर फैलाई गईं।

‘लव जिहाद’ के बहाने हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर किया गया। गांवों की पंचायतों से इसके ख़िलाफ़ प्रस्ताव भी पारित कराए गए।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और इसके साथ सटे हरियाणा की कई खाप पंचायतों द्वारा हिंदू लड़कियों के मोबाइल रखने पर रोक लगा दी गई।

इसी लव जिहाद के प्रचार की वजह से 2013 में मुज़फ़्फ़रनगर में बड़ी संख्या में हत्याएं हुईं, औरतों से बलात्कार किया गया और 50 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।

बीते दिनों उत्तरप्रदेश सरकार धर्मांतरण अध्यादेश लाई तो एक बार फिर लव जिहाद शब्द को हवा मिल गई। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय की ओर से फतवा आया। इस फतवे में कई बातों का न सिर्फ जवाब दिया गया, बल्कि एक किस्म का विचार दिया गया, जाे कई कोण से हिंदू कट्टरपंथी समुदाय से मेल खाता है।

ऐसा लगता है, कट्टरपंथी किसी भी मजहब में हों, उनकी नजर में औरत की एक आज़ाद नागरिक के रूप में हैसियत ही नहीं है।


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‘लव जिहाद’ पर जारी फतवे के कुछ ही अंश पढ़िए। फतवे में कहा गया है, ‘लव जेहाद’ , ‘लव’ इंग्लिश का लफ्ज है, जिसके माना है ‘मुहब्बत’। और ‘जेहाद’ अरबी लफ्ज है, जो ‘जोहद’ से बना है, जिसके माना है ‘कोशिश करना’। यानी सही राह से भटके हुए को राहे रास्त पर लाने की कोशिश करना।

फतवा में एक जगह कहा गया है, ” गैर मुस्लिम क्या, खुद मुस्लिम बल्कि खुद ऐसे खानदान की लड़कियों से भी जो मेहरम न हों, उनसे बेपर्दा बातचीत करने, उनके साथ एकसोई निशस्तो बर्खास्त गर्ज हर वो अमल जो इन दोनों के दरम्यान नाजायज रिश्ते का बहाना है, सख्त मना है।”

फतवे में एक जगह कहा गया है, ”हकीकत ये है कि ये बीमारियां मगरिबी तहजीब और मख्लूत निजामे तालीम व नीम बरहना लिबास और गैर अखलाकी तहरीरों के मुताला और मोबाइल फोन बगैरा के इस्तेमाल का नतीजा है। खुद स्कूल व कॉलेज में लड़कों से कहीं ज्यादा लड़कियों के लिबास स्कूल ड्रेस में ऐसी तखफीफ का जाब्जा नाफिज किया गया जिससे लड़कों की ख्वाहिशातें नफसानी को दावत दी जा रही है।”

”जरूरत इस बात की है के हर ऐसी चीज पर पाबंदी लगा दी जाए जो बेहयाई बेगैरती का जरिया हो।”


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यह सलाह तकरीबन वैसी ही है, जैसे खाप पंचायतों ने फरमान जारी किया।

ताजा इत्तेफाक काबिलेगौर है, हिंदूवादी संगठनों की तरह मरकजे बरेलवी की ओर से वैलेंटाइन डे न मनाने का हुक्म हुआ है।

 

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