जानिए कब रखा जाएगा रमज़ान का पहला रोजा, देश-विदेश में भेजी रही दरगाह आला हज़रत से जंतरी

द लीडर हिंदी : रमजान (रमदान) इस्लाम धर्म के लोगों के लिए पाक और खास महीना होता है, जोकि इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है. रमजान के इस महीने में मुसलमान पूरे एक महीने तक रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं.रमजान में सुबह सेहरी (सुहूर) करने के बाद रोजा की शुरुआत होती है और शाम में इफ्तार के साथ रोजा खोला जाता है. रमजान के आखिरी दिन चांद का दीदार होने के बाद ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जाता है.

इस्लामी कैलेंडर का सबसे मुक़द्दस महीना रमज़ान दस्तक दे रहा है. नौ या फिर दस दिन बाद से इस मुबारक महीने का आग़ाज़ हो जाएगा. उससे पहले इमाम अहमद रज़ा ख़ान आला हज़रत की दरगाह से रमज़ान का टाइम-टेबुल यानी जंतरी जारी कर दी गई है. इसके मुताबिक़ रमज़ान का पहला रोज़ा 12 मार्च को आसमान पर चांद दिखाई देने के बाद होगा. उस दिन सहरी का वक़्त तड़के 5 बजकर 4 मिनट पर ख़त्म हो जाएगा.

घड़ी की सुई के 5 बजकर 4 मिनट पर पहुंचने के साथ ही खाने-पीने पर पाबंदी लग जाएगी. यह 13 घंटे 19 मिनट तक चलेगी. पहले रोज़े के इफ़्तार का वक़्त 6 बजकर 23 मिनट है. 30 रमज़ान तक सहरी का वक़्त घटेगा और इफ़्तार का वक़्त बढ़ता चला जाएगा. 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होने वाली पहली सहरी 4 बजकर 46 मिनट तक पहुंच जाएगी. इसी तरह इफ़्तार के वक़्त में हर दिन एक या दो मिनट बढ़ते रहेंगे.

इस तरह रमज़ान का 30वां रोज़ा शाम 6 बजकर 30 मिनट पर खोला जा सकेगा. यह रमज़ान का सबसे लंबा रोज़ा होगा, जो 14 घंटे 4 मिनट तक चलेगा. दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ़्ती मुहम्मद अहसन रज़ा क़ादरी अहसन मियां की तरफ से जारी की गई जंतरी में रोज़े से मुताल्लिक़ अहकाम पर भी रोशनी डाली गई है. मसलन रोज़े की हालत में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए. क़हक़हे लगाने, शतरंज, जुआ, ताश खेलने, तमाशा और फ़िल्म देखने, बीवी को चूमने की मनाही है. रोजे़ में इन कामों को मकरूह क़रार दिया गया है.

ख़शबू लगाने, सूंघने, सिर, कान या बदन पर तेल लगाने, आंखों में सुरमा लगाने और मिस्वाक करने में कोई हर्ज नहीं है. जंतरी में रोज़ा रखने, इफ़्तार करने की दुआ, , सदक़ा-ए-फ़ित्र, एतकाफ़, तरावीह, ईद की नमाज़ का तरीक़ा भी बताया गया है. दरगाह आला हज़रत के मीडिया प्रभारी नासिर क़ुरैशी ने बताया कि रमज़ान की जंतरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डाक के ज़रिये अक़ीदतमंदों और मुरीदीन को भेजा जा रहा है. जंतरी में यह भी साफ किया गया है कि इसमें दिया गया वक़्त सिर्फ बरेली के लिए है, दीगर इलाक़ों के लिए नहीं.

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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