सरकारी सिस्टम की खुली पोल : मुजफ्फरनगर में सरकारी कागजों में मुर्दा बनी बुजुर्ग महिला आई सामने

द लीडर। एक तरफ योगी सरकार जहां प्रदेश में विकास कार्य कर पूरी दुनिया में यूपी को रोशन कर रही है। तो वहीं दूसरी तरफ सरकार के अधिकारी सरकार की इस मंशा पर कालिख पोतते नजर आ रहे है। ये हम ऐसे ही नहीं कह रहे हैं बल्कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में जिला प्रशासन की अमानवीय काली करतूत सामने आई है। जिससे लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। बता दें कि, मुजफ्फरनगर के जिला प्रशासन ने एक विधवा लाचार बेसहारा पेंशन धारी बुजुर्ग महिला को सरकारी कागजों में मृत दिखाकर उसकी रोजी-रोटी का सहारा बनी विधवा पेंशन योजना को ही बंद कर दिया। पीड़ित महिला जब सामने आई तो सरकारी सिस्टम की पोल खुल गई। आनन-फानन में जिला प्रशासन ने इस मामले आज जांच करा कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।


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फाइलों में दफनाई गई बुजुर्ग बूंदी, पेंशन रोकी

बता दें कि, यह कहानी बुजुर्ग बूंदी की है। विधवा, बेऔलाद, बेघर और बेपरिवार बूंदी की। खतौली के मिट्ठूलाल मोहल्ले में पड़ोसियों की मदद और वृद्धावस्था पेंशन के सहारे जिंदगी गुजार रही बूंदी को सरकारी नुमाइंदों ने पेंशन के वार्षिक भौतिक सत्यापन में मृत दर्शाकर पेंशन रोक दी। फाइलों में दफनाई गई बूंदी खुद दफ्तर के चक्कर काटकर जिंदा होने का सुबूत देती रही, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसडीएम तक मामला पहुंचा तो जांच में बूंदी जिंदा निकली।

बुजुर्ग ने एसडीएम को सुनाई पीड़ा

समाजसेवी जमीन अंसारी के साथ बुजुर्ग बूंदी (85) एसडीएम खतौली जीत सिंह राय के सामने हाजिर हुई और खुद को जिंदा बताते हुए पीड़ा सुनाई। ये देख उपजिलाधिकारी भी हैरान रह गए और त्वरित कार्रवाई करते हुए लेखपाल अजेंद्र सिंह राठी को बुलाकर मामले की जांच के आदेश दिए। लेखपाल ने महिला के नाम से जारी आधार कार्ड देखा। भौतिक सत्यापन का वह कागज भी देखा, जिसमें महिला को मृत दर्शाया गया था। करीब एक घंटे की जांच के बाद माना गया कि, तहसील पहुंची बुजुर्ग महिला बूंदी ही है और जिंदा है। लेखपाल ने रिपोर्ट एसडीएम को भेजी तो फाइलों में मृत बुजुर्ग महिला फिर से जिंदा हो गई।


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दोषी कर्मचारियों पर हो सख्त कार्रवाई

बता दें कि, 85 साल की बुजुर्ग बूंदी कमजोर हो गई है। लेखपाल जिस समय जांच कर रहे थे, तब महिला ने कहा कि, मेरे पड़ोसी और मेरा खतौली मेरी मदद करता है। एसडीएम जीत सिंह राय ने बताया कि, प्रकरण की जांच कराई गई है। तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बूंदी की पेंशन बहाली के आदेश दिए गए हैं। वहीं लेखपाल अजेंद्र सिंह राठी का कहना है कि प्रकरण की जांच की गई है। बूंदी जिंदा है। किसी वजह से उसे सत्यापन में मृत बताया गया था, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। समाजसेवी जमील अंसारी कहते हैं कि, बुजुर्ग बेसहारा है। सभी लोग उसकी मदद करते रहते हैं। जिन कर्मचारियों ने उन्हें जिंदा रहते हुए मृत बता दिया, ऐसे कर्मचारियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।

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