पांच बार के विधायक हाजी रियाज़ के बेटे को नहीं मिला टिकट, परिवार की सपा से बग़ावत-चुनाव लड़ने का ऐलान

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Haji Riyaz Pilibhit Election
मरहूम हाजी रियाज़ अहमद.

द लीडर : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक और मंत्री रहे कद्​दावर समाजवादी नेता हाजी रियाज़ अहमद का पिछले साल कोरोना में इंतक़ाल हो गया था. उनके बेटे डॉ. शाने अली पिता की सीट से टिकट के मज़बूत दावेदार थे. समाजवादी पार्टी ने यहां से डॉ. शैलेंद्र गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. जिससे आह्त रियाज़ समर्थकों ने पार्टी से बग़ावत कर दी. उनकी बेटी डॉ. बुशरा रियाज़ ने हर हाल में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. (Haji Riyaz Pilibhit Election)

आपको बता दें कि हाजी रियाज़ अहमद के बाद उनकी बेटी रुकैया जोकि जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं. उनका भी इंतक़ाल हो गया था. एक ही परिवार के दो मजबूत नेताओं की मौत के बाद भी पार्टी आलाकमान का एक भी नुमाइंदा हाजी रियाज़ अहमद के घर नहीं पहुंचा. बताते हैं कि उनके परिवार और समर्थकों को इसका भी मलाल है.

हाज़ी रियाज़ अहमद के इंतक़ाल के बाद सदर सीट पर दावेदारों की लंबी लाइन थी. कई मुस्लिम नेता भी उम्मीद लगाए थे. दूसरी तरफ डॉ. शाने अली क्षेत्र में सक्रिय हो गए. और पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में जी-जान से जुट गए. लेकिन ऐन वक़्त पर पार्टी से उन्हें बड़ा झटका तब मिला, जब यहां से डॉ. शैलेंद्र गंगवार के नाम का ऐलान हो गया. (Haji Riyaz Pilibhit Election)


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डॉ. शाने अली अभी लखनऊ में हैं. इधर मंगलवार को उनकी छोटी बहन डॉ. बुशरा रियाज़ ने अपने समर्थकों की मीटिंग बुलाई. और उनसे राय-मशविरा करने के बाद चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

डॉ. बुशरा या रियाज़ धड़े की बग़ावत के बाद निश्चित तौर पर सदर सीट पर समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं. इसलिए भी क्योंकि रियाज़ परिवार के साथ मुस्लिम समाज के एक बड़े हिस्से की सहानुभूति है. जो उनके परिवार के ही सदस्य को चुनाव लड़ाने की ख्व़ाहिश रखते हैं. (Haji Riyaz Pilibhit Election)

हाजी रियाज़ अहमद समाजवादी पार्टी की स्थापना के साथ ही उससे जुड़े हैं. पहली बार 1985 में विधायक बने थे. 2007 से 2017 तक सदर सीट से लगातार 3 बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे. तमाम उलट-फेर के बाद भी उन्होंने पार्टी नहीं बदली. अपने इंतक़ाल के वक़्त तक वह समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक सभा के अध्यक्ष रहे हैं.

पीलीभीत के ही समाजवादी पार्टी के नेता बताते हैं कि एक दौर था जब पीलीभीत में समाजवादी पार्टी का मतलब हाजी रियाज़ हुआ करते थे. लेकिन अब उनके न होने पर पार्टी ने परिवार को उनकी मुहब्बत का सिला नहीं दिया है.

हालांकि डॉ. शाने अली का टिकट न होने की एक बड़ी वजह परिवार का अंदरूनी घमासान भी माना जा रहा है. मरहूम रुकैया के शौहर मुहम्मद आरिफ भी अपने सदर सीट से ही टिकट की दावेदारी पेश कर रहे थे. एक ही परिवार से दो लोगों का टिकट लिए भिड़ना भी बड़ा कारण रहा है. आरिफ का क्या रुख है-वो अभी साफ नहीं हो सका है.

पीलीभीत के अलावा बदायूं सदर सीट पर भी घमासान है. यहां से पूर्व मंत्री आबिद रज़ा का टिकट नहीं हुआ है. उनके स्थान पर सपा ने क़ाजी रिज़वान को कैंडिडेट बनाया है. हालांकि आबिद धड़े के विरोध के पार्टी ने उन्हें लखनऊ बुलाया है. उम्मीद जताई जा रही कि यहां फेरबदल हो सकता है. आबिद रज़ा रामपुर के सांसद आज़म ख़ान के सबसे क़रीबियों में माने जाते हैं. (Haji Riyaz Pilibhit Election)

 

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