नवाब ख़ानदान के ख़िलाफ सियासी सफ़र शुरू करने वाले आज़म ख़ान को उसी घराने से चैलेंज-भाजपा गठबंधन का सहारा

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Azam Khan Rampur Nawab
आज़म ख़ान और अब्दुल्ला आज़म. दूसरी तस्वीर में अपना दल की अनुप्रिया पटेल के साथ नवाब ख़ानदान के हैदर अली ख़ान उर्फ हमज़ा मियां.

द लीडर : उत्तर प्रदेश के कद़दावर समाजवादी नेता आज़म ख़ान (Azam Khan) ने रामपुर में जिस नवाब ख़ानदान (Rampur Nawab Family) के ख़िलाफ अपने सियासी सफ़र का आगाज़ किया था. क़रीब 42 साल बाद वही परिवार आज़म फैमिली का चैलेंज बन गया है. रामपुर की स्वार विधानसभा सीट इसकी मिसाल है. जहां से कांग्रेस उम्मीदवार हैदर अली ख़ान उर्फ हमजा मियां एनडीए गठबंधन के सहयोगी अपना दल के टिकट पर स्वार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. (Azam Khan Rampur Nawab)

स्वार सीट से आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं. 2017 में अब्दुल्ला ने स्वार के सीटिंग विधायक नवाब काजिम अली खान को हराया था, जोकि हैदर अली के पिता हैं. पिछले चुनाव में कुल 2,05,962 लोगों ने वोट डाले थे. इसमें अब्दुल्ला को 1,06,443 वोट मिले थे. जबकि भाजपा के लक्ष्मी सैनी को 53,347 आैर बसपा प्रत्याशी नवाब काजिल अली को 42,233 वोट मिले थे.

इससे पहले 2012 के चुनाव पर नजर डालें तो नवाब काजिम अली स्वार से विधायक निर्वाचित हुए थे. तब उन्हें 55,469 वोट मिले थे. उनके प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी सैनी को 41,754 और सपा उम्मीदवार अब्दुल गफूर इंजीनियर को 37,828 वोट मिले थे. (Azam Khan Rampur Nawab)


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नवाब काजिम अली 2007 और 2012 में स्वार से लगातार दो बार विधायक रहे हैं. इस बार उन्होंने अपने बेटे हैदर अली को यहां से अब्दुल्ला के सामने उतारा है.

अभी तक ये लड़ाई उतनी दिलचस्प नहीं थी और अब्दुल्ला के लिए जीत की राहें आसान थीं. लेकिन अब जब यहां से हैदर अली भाजपा के सहयोगी अपना दल के कैंडिडेट हो गए हैं, तो अब्दुल्ला की राह थोड़ी मुश्किल हो गई है. क्योंकि भाजपा के साथ नवाब ख़ानदान का अपना जनाधार है, जिससे इस सीट का मुक़ाबला दिलचस्प हो गया है. (Azam Khan Rampur Nawab)

ऐसा ही मंजर रामपुर शहर सीट का है, जहां से आज़म ख़ान कैंडिडेंट हैं. आज़म के सामने नवाब काजिम अली खान हैं, जो कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. यानी नवाब ख़ानदान से आज़म ख़ान और उनके बेटे अब्दुल्ला को सीधे टक्कर मिल रही है.

लेकिन अब देखना ये है कि रामपुर की अवाम आज़म ख़ान पर यकीना बनाए रखती है या फिर नवाब ख़ानदान पर. बहरहाल, रामपुर में जहां सीधे तौर पर भाजपा आज़म ख़ान को झटका देने में कामयाब नहीं हो पाई. वहां बदले सियासी समीकरण आज़म परिवार के लिए थोड़ा चैलेंजिंग जरूर हो गए हैं. (Azam Khan Rampur Nawab)

अब्दुल्ला आज़म हाल ही में क़रीब 2 साल बाद जेल से बाहर आए हैं, जबकि आज़म ख़ान अभी भी जेल में हैं. 26 फरवरी 2020 को इन लोगों ने रामपुर की स्थानीय अदालत में सरेंडर किया था.

जेल में आज़म ख़ान की सेहत काफी अच्छी नहीं है. वह कोविड संक्रमण का भी सामना कर चुके हैं. और उम्र का भी असर है. आज़म ख़ान 73 साल के हैं. इस उम्र में लंबी जेल और मुक़दमों के बोझ ने उन्हें शरीर काफी खराब असर डाला है. (Azam Khan Rampur Nawab)

आपको बता दें कि आज़म ख़ान अभी रामपुर से सांसद हैं. वह 9 बार विधायक रहे हैं. 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे. आज वह जेल में हैं.

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