बांग्लादेश में प्रकाशक की हत्या पर आठ इस्लामिक चरमपंथियों को मौत की सजा

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बांग्लादेश में बुधवार को प्रकाशक की हत्या का दोषी पाए जाने पर अदालत ने आठ इस्लामिक चरमपंथियों को मौत की सजा सुना दी। सजा के बाद से मुस्लिम-बहुल राष्ट्र के धार्मिक कट्टरपंथियों और धर्मनिरपेक्षतावादियों के बीच तनाव है।

कई नास्तिक विचारों वाली पुस्तकों का विमोचन करने वाले ढाका स्थित प्रकाशन गृह के मालिक 43 वर्षीय फैसल आरिफिन दीपन को अक्टूबर 2015 में एक स्थानीय जिहादी समूह ने निशाना बनाया।


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यह हमला 2013 और 2016 के बीच हिंसा की लहर का हिस्सा था, जिसमें धर्मनिरपेक्ष एक्टिविस्ट, ब्लॉगर्स और नास्तिक लेखकों को टारगेट किया जा रहा था।

प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने हिंसा का जिम्मेदार मानकर इस्लामी राजनीतिक दलों के कई शीर्ष के नेताओं को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया।

अभियोजन अधिवक्ता गोलम सरवर ज़ाकिर ने कहा, ढाका के विशेष आतंकवाद-विरोधी न्यायाधिकरण के न्यायाधीश ने सभी आठ अभियुक्तों को दोषी ठहराया।

जाकिर के अनुसार, ” न्यायाधीश ने कहा कि उनका मकसद ब्लॉगर्स, लेखकों और प्रकाशकों की हत्या करके लोगों की आवाज को खत्म करना था। वे लोगों में दहशत पैदा करके सार्वजनिक सुरक्षा को धता बताना चाहते थे।”

दो लोगों को उनकी गैरमौजूदगी में सजा सुनाई गई, जिसमें मास्टरमाइंड सैयद जियाउल हक और एक बर्खास्त सेना अधिकारी जाकिर शामिल हैं।

जियाउल हक पर कई सेक्युलर एक्टिविस्ट की हत्याओं का आरोप है। आठ आरोपियों के बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वे सजा के खिलाफ अपील करेंगे।


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बांग्लादेश सरकार ने इस्लामिक चरमपंथियों पर नकेल कसने के लिए हाल के वर्षों में दो बड़ी आतंकवाद-रोधी पुलिस इकाइयों की स्थापना की है।

देशभर में आतंकवाद विरोधी छापे में 100 से अधिक संदिग्ध इस्लामवादियों को मार गिराया गया है और सैकड़ों को हिरासत में लिया गया है। करीब आधा दर्जन इस्लामिक आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

बांग्लादेशी स्टार क्रिकेटर शाकिब अल हसन कट्टरपंथियों का नया निशाना बन गए हैं और पड़ोसी देश भारत में एक हिंदू समारोह में भाग लेने पर धमकाने के बाद उन्हें एक सशस्त्र अंगरक्षक दिया गया है।

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