शाहीनबाग़ में बुल्डोजर के सामने लेट गए लोग, बोले-मुसलमानों के दिमाग़ पर चलाया जा रहा बुल्डोजर

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Shaheenbagh Bulldozer Muslims Delhi
दिल्ली के शाहीनबाग़ में अतिक्रमण हटाने पहुंचा बुल्डोजर.

द लीडर : नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और एनआरसी आंदोलन, आज़ाद भारत में अल्पसंख्यकों का सबसे बड़ा मूवमेंट रहा है. जिसका सेंटर दिल्ली का शाहीनबाग़ था. संवैधानिक, अनुशासन और नैतिकता के दायरे में रहकर ये आंदोलन क़रीब 100 दिन तक चला था. जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा. आज 2 साल बाद यही शाहीनबाग़ बुल्डोजर के निशाने पर है. सोमवार को दिल्ली नगर निगम का बुल्डोजर अतिक्रमण हटाने शाहीनबाग़ पहुंचा, तो एक बार इसके ख़िलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इसमें कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. (Shaheenbagh Bulldozer Muslims Delhi)

पिछले अप्रैल महीने में ही निगम ने दिल्ली के जहांगीरपुरी में बुल्डोजर चलाकर 50 से ज़्यादा दुकानें तोड़ी थीं. जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने जहांगीरपुरी में बुल्डोजर पर स्टे दे दिया था. सुप्रीमकोर्ट के आदेश के 2 घंटे बाद तक जहांगीपुरी में दुकानें तोड़ी जाती रहीं. तब सीपीएम नेता बृंदा करात सुप्रीमकोर्ट का ऑर्डर लेकर बुल्डोजर के सामने खड़ी हो गईं थीं. और अब ये बुल्डोजर शाहीनबाग़ पहुंच गया है. शाहीनबाग में अतिक्रमण के नाम पर बुल्डोजर कार्रवाई को सीपीएम ने अमानवीय, असंवैधानिक और अस्वीकार्य बताया है.

सोमवार को शाहीनबाग़ में दिल्ली पुलिस फोर्स की मौजूदगी में निगम के अधिकारी अतिक्रमण हटाने पहुंचे. जहां सैकड़ों स्थानीय लोग बुल्डोजर के सामने खड़े हो गए. और कार्रवाई के ख़िलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार मुसलमानों के दिमाग़ पर बुल्डोजर चला रही है.


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दिल्ली में 1700 से ज़्यादा अनाधिकृत कॉलोनियां हैं, जिन्हें वैध किए जाने की प्रक्रिया चल रही है. इन कॉलोनियों में कोई 50 लाख से अधिक लोग रहते हैं. इसी तरह क़रीब 860 स्लम कॉलोनिया हैं. जहां 10 लाख की आबादी है. दिल्ली के नगर निगमों पर भाजपा का क़ब्जा है. चंद दिनों बाद ही दिल्ली निगम के चुनाव होने वाले हैं, जिसको लेकर भाजपा और दिल्ली की आप सरकार के बीच घमासान छिड़ा है. और इस बीच निशाने पर मुस्लिम बाहुल्य इलाके हैं. (Shaheenbagh Bulldozer Muslims Delhi)

सोमवार को जब निगम के अधिकारी अतिक्रमण हटाने शाहीनबाग़ पहुंचे तो इसे आंदोलन से भी जोड़कर देखा जाने लगा. कई लोग बुल्डोजर के आगे लेट गए, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया. आपको बता दें कि जहांगीपुरी में जब बुल्डोजर चला था, तब से ही जामियानगर इलाके में भारी फोर्स लगातार गश्त करती रही है. अचानक क्षेत्र में फोर्स की गश्ती को लेकर यहां कोई न कोई कार्रवाई होने की चर्चा पहले से ही आम थी. जो अब बुल्डोजर के तौर पर सामने आ रही है.

मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे अल्पसंख्यक मुसलमानों के ख़िलाफ राजनैतिक द्वेष की कार्रवाई बताया है. जमीयत उलमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और दूसरे संगठन इन कार्रवाईयों के ख़िलाफ क़ानूनी लड़ाई का दम भर रहे हैं. लेकिन एक के बाद एक, जिस तरह से मुसलमानों की प्रॉपर्टीज पर बुल्डोजर चल रहा है, उससे एक बड़े वर्ग में बेचैनी का भाव और रोज़ी-रोटी का संकट ज़रूर पैदा होता जा रहा है.

बहरहाल, भारी विरोध-प्रदर्शन के बीच शाहीनबाग़ में बुल्डोजर का मामला सुप्रीमकोर्ट पहुंच गया है. और एमसीडी को बुल्डोजर पीछे हटाने पड़े. यहां सीआरपीएफ के क़रीब 100 जवान तैनात किए गए हैं. आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान ने कहा कि निगम ये सब राजनीतिक कारणों से कर रही है. अगर कहीं अवैध क़ब्जा चिन्हित किया है तो हमें बताए, हम आम सहमति से उसे हटवाएंगे. (Shaheenbagh Bulldozer Muslims Delhi)

लेकिन आप विधायक अमातुल्लाह ख़ान का ये पर्सनल स्टैंड है, जो वो पहले भी लेते रहे हैं. दरअसल, जहांगीरपुरी में जब बुल्डोजर चला था, तो उनकी पार्टी का स्टैंड बुल्डोजर के पक्ष में था. आप सांसद राघव चड्ढा से लेकर आतिशी, संजय सिंह और मनीष सिसौदिया सभी ने एक सुर में ये कहा था कि भाजपा नेताओं ने घूस लेकर बांग्लादेशी और रोंहिग्या को दिल्ली में बसाया है. ज़रूरत पड़ने पर उन्हीं लोगों को पैसा देकर फसाद कराते हैं.

मतलब आम आदमी पार्टी ने भाजपा से चुनावी मोर्चा लेने के लिए मुसलमानों को भारतीय मानने से ही इनकार कर दिया. इस तरह अमातुल्लाह ख़ान अपनी ही पार्टी में अपने लोगों को लेकर अलग-थलग नज़र आ रहे हैं. वह सोमवार को भी शाहीनबाग़ पहुंचे और लोगों से बातचीत की. ख़ैर अब इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई होगी. और क्या फ़ैसला आएगा, इस पर सबकी नज़रें हैं. (Shaheenbagh Bulldozer Muslims Delhi)

वहीं, सुप्रीमकोर्ट ने शाहीनबाग़ अतिक्रमण मामले को सुनने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा. एससी से याचिका ख़ारिज होने के बाद याची हाईकोर्ट जाएंगे.


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