किसान आंदोलन की जीत के जश्न में डूबी दिल्ली

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जिद नहीं संकल्प, हर चुनौती का सामना करने का कलेजा, आंधी, तूफान, बारिश, कड़ाके की सर्दी, चिलचिलाती धूप। यही सब झेलकर खेतों में अनाज पैदा करता है किसान। जब हक के लिए लड़ने की बारी आई तो भी यह सब झेला और एक हद तक संघर्ष उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां से दूसरी फसल को बोहने का वक्त आता है। आंदोलन की पहली फसल को उठने में एक साल लगा, लेकिन पसीने का हर कतरा और मुश्किल हालातों का हिसाब हो गया। (Celebration Of Farmers Movement)

किसानों के लिए यही वो मौसम है, जब जश्न के मौके आते हैं, एक फसल काट ली और दूसरी की तैयारी कर दी। सारे मेले, शादी-ब्याह भी पूरी फुर्सत में इसी मौसम में होते हैं तो फिर साझी जीत का जश्न कैसे कम हो सकता है। लिहाजा, ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के साथ ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का रेला चल पड़ा है। बड़ी संख्या में देशभर से किसान देर शाम दिल्ली के बॉर्डरों पर जत्थे की शक्ल में पहुंच गए और यह सिलसिला जारी है। बॉर्डरों के आसपास के क्षेत्रों से लोग सुबह के वक्त पहुंचेंगे। जीत का यह जश्न दो दिन चलेगा, जिसमें बाकी मांगों को भी उठाया जाएगा। 

तीन नए कृषि कानूनों की वापसी के प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद आंदोलनकारी किसानों के तेवर कमजोर नहीं पड़े हैं। इसके बाद उन्होंने तयशुदा कार्यक्रम उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में महापंचायत करके संकेत भी दे दिया है। किसानी काफी खुश भी हैं, लेकिन आगे के संघर्ष के लिए तैयार हो गए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने 26-27 नवंबर को “दिल्ली चलो” के आह्वान के साथ किसान आंदोलन कल ऐतिहासिक संघर्ष का एक साल पूरा करेगा।

एसकेएम ने कहा कि इतना लंबा संघर्ष भारत सरकार की अपने मेहनतकश नागरिकों के प्रति असंवेदनशीलता और अहंकार स्पष्ट प्रतिबिंब है। दुनिया के स्तर पर इतिहास में सबसे बड़े और लंबे आंदोलनों में से एक इस किसान आंदोलन में 12 महीनों के दौरान करोड़ों लोगों ने भाग लिया और आंदोलन भारत के हर राज्य, हर जिले और हर गांव तक पहुंचा।

तीन किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करने के सरकार के निर्णय और कैबिनेट की मंजूरी के अलावा, किसान आंदोलन ने किसानों, आम नागरिकों और देश के लिए कई तरह की जीत हासिल की। आंदोलन ने क्षेत्रीय, धार्मिक या जातिगत विभाजनों को खत्म करते हुए किसानों के लिए एकीकृत पहचान की भावना भी पैदा की। किसान के रूप में अपनी पहचान और नागरिकों के रूप में अपने अधिकारों के दावे में किसान सम्मान और गर्व की एक नई भावना देख रहे हैं। इसने भारत में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की जड़ें गहरी की हैं। (Celebration Of Farmers Movement)

एसकेएम ने कहा, आंदोलन भाग लेने वाले प्रत्येक प्रदर्शनकारी के शांतिपूर्ण दृढ़ संकल्प के कारण ही खुद को बनाए रखने और मजबूत करने में सक्षम रहा। आंदोलन ने ट्रेड यूनियनों, महिलाओं, छात्रों और युवा संगठनों समेत तमाम प्रगतिशील और लोकतांत्रिक जन संगठनों के सहयोग से भी ताकत हासिल की।

भारत के लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दल सालभर संघर्ष में किसानों के समर्थन में खड़े हुए। इस जन आंदोलन में कलाकारों, शिक्षाविदों, लेखकों, डॉक्टरों, वकीलों आदि सहित समाज के कई वर्गों ने अपना योगदान दिया। एसकेएम इस आंदोलन के सभी प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति अपनी गहरा आभार व्यक्त करता है, और एक बार फिर दोहराता है कि तीन किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करना आंदोलन की सिर्फ पहली बड़ी जीत है, किसानों की बाकी जायज़ मांगें पूरा होने का इंतजार है। (Celebration Of Farmers Movement)

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर दिल्ली मोर्चा और राज्यों की राजधानियों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के साथ ऐतिहासिक किसान आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने की यादगार के लिए किसान बड़ी संख्या में एकजुट हो रहे हैं। दिल्ली के विभिन्न मोर्चों पर हजारों की संख्या में किसान पहुंचने लगे हैं।

दिल्ली से दूर राज्यों में इस आयोजन को रैलियों, धरने और अन्य कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है। कर्नाटक में हाईवे जाम के कार्यक्रम में किसान अहम हाईवे को जाम करेंगे। तमिलनाडु, बिहार और मध्य प्रदेश में ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त रूप से सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। रायपुर और रांची में ट्रैक्टर रैलियां होंगी। पश्चिम बंगाल में कल कोलकाता और अन्य जिलों में रैली की योजना है। कल दुनियाभर के कई देशों में आंदोलन से एकजुटता का प्रदर्शन भी होगा। (Celebration Of Farmers Movement)

संयुक्त किसान मोर्चा ने जारी एक बयान में बताया, 25 नवंबर को हैदराबाद में महाधरना किया गया, जिसमें तेलंगाना के किसानों ने बड़े पैमाने पर भाग लिया। उपस्थित लोगों ने सभी कृषि उत्पादों पर एमएसपी के कानूनी अधिकार, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने, किसानों को दिल्ली की वायु गुणवत्ता से संबंधित कानूनी विनियमन के दंडात्मक प्रावधानों से बाहर रखने, विरोध करने वाले हजारों किसानों के खिलाफ मामलों को वापस लेने और अजय मिश्रा ‘टेनी’ की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी सहित किसान आंदोलन की लंबित मांगों को उठाया। कार्यक्रम में किसान आंदोलन के शहीदों की सूची प्रदर्शित कर श्रद्धांजलि दी गई।

28 नवंबर को मुंबई के आजाद मैदान में विशाल किसान-मजदूर महापंचायत होगी। महापंचायत का आयोजन संयुक्त शेतकारी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के संयुक्त बैनर तले 100 से अधिक संगठनों द्वारा किया जाएगा, जिसमें पूरे महाराष्ट्र के किसानों, श्रमिकों और आम नागरिकों की भागीदारी होगी।

सालभर से चल रहे किसान आंदोलन में अब तक 683 किसानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। एसकेएम ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में उठाई गई अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने और उनके परिवार के पुनर्वास की घोषणा करे और सिंघू मोर्चा पर उनके नाम पर स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करे। (Celebration Of Farmers Movement)

27 नवंबर को सिंघू मोर्चा पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी। बैठक में किसान संगठन आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेंगे।


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