आज़म ख़ान के बाद राहुल गांधी से भी छिना सदन में दाख़िल होने-बोलने का हक़

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The Leader. सपा के क़द्दावर नेता मुहम्मद आज़म ख़ान, अब्दुल्ला आज़म, विक्रम सैनी के बाद अब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के फेर में फंस गए हैं. दो साल सज़ा होने के बाद सचिवालय ने शुक्रवार को लोकसभा सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी. रामपुर और खतौली की तरह अब वायनाड में भी उपचुनाव कराया जाएगा. राजनीतिक एतबार से यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है.


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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के ख़िलाफ़ सदस्यता रद होने की कार्रवाई मानहानि मामले में सूरत की अदालत के दो साल की सज़ा सुनाने के बाद की गई है. यह मुक़दमा मोदी सरनेम पर टिप्पणी करने का है. गुरुवार को जब राहुल गांधी को सज़ा सुनाई गई थी तो तमाम तरह के क़यास थे. उनकी सदस्यता बचेगी या जाएगी. ख़ैर लोकसभा सचिवालय ने एक अधिसूचना जारी करके केरल की वायनाड लोकसभा सीट सज़ा वाले दिन यानी 23 मार्च, 2023 से से ही रिक्त घोषित कर दी है. ज़ाहिर सी बात है इससे कांग्रेस में खलबली मचनी थी और ऐसा दिख भी रहा है.


मुहम्मद आज़म ख़ान सियासत के अर्श से फ़र्श तक


राहुल गांधी के पास ऊपरी अदालत में सज़ा के खिलाफ़ अपील के लिए एक महीने का वक़्त है. उससे सदस्यता रद होने को लेकर घमासान छिड़ गया है. कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे का कहना है कि सरकार किसी भी बोलने वाले को सदन में नहीं देखना चाहती. कांग्रेस की तरफ से और भी तीखे बयान आ रहे हैं. अब अगर आज़म ख़ान की बात करें तो उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को विधानसभा की सदस्यता के साथ वोट के अधिकार से भी हाथ धोना पड़ा है. दोनों ही अपील में गए लेकिन राहत नहीं मिल पाई है. आज़म ख़ान रामपुर में उपचुनाव नहीं लड़ पाए और यही स्थिति अब्दुल्ला आज़म के साथ है. राहुल गांधी भी क्या यह सब फेस करेंगे, उसके लिए इंतज़ार करना होगा. वैसे सज़ा होने पर राज्यसभा के सदस्य रशीद मसूद, विधानसभा के सदस्य कुलदीप सेंगर, खतौली के भाजपा विधायक विक्रम सैनी को भी सदस्स्यता से हाथ धोना पड़ चुका है.