अखिलेश-जयंत की दोस्ती में भी आई दरार? सपा के सामने रालोद ने उतारे प्रत्याशी

UP Nikay Chunav 2023: देश के सबसे बड़े सूबे में निकाय चुनाव हो रहे हैं जिससे 2024 के सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा है लेकिन नगर निकाय चुनाव की रणभूमि में उतरने के साथ ही सपा रालोद गठबंधन में घमासान शुरू हो गया है। ऐसा देखने को मिल रहा है कि कई सीटों पर सपा और रालोद दोनों ने ही अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। हैरत की बात यह है इस समय कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।

इसके पहले आपको बताते चलें, यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान सपा रालोद का गठबंधन हुआ था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने खास तौर पर पश्चिमी यूपी में जमकर प्रचार किया। एलान किया गया कि यह गठबंधन नगर निकाय चुनाव में भी चलेगा। लेकिन चुनाव से पहले रालोद प्रदेश अध्यक्ष रामशीष राय ने बड़ौत में घोषणा कर दी कि रालोद निकाय चुनाव अपने दम पर चुनाव लड़ेगा तो इसे लेकर रालोद और सपा दोनों में ही हंगामा मच गया ।

रालोद ने इस बात पर सफाई देते हुए कहा कि प्रत्याशी रालोद और सपा की साझा कमेटी चुनेगी और गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा। अब चुनाव आया तो दोनों के बीच रार खुलकर सामने आ गई है। कई सीटों पर सपा और रालोद ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

बिजनौर जिले में ही बिजनौर नगर पालिका परिषद समेत अध्यक्ष पद के लिए छह सीटों हल्दौर, नहटौर, नूरपुर, धामपुर, चांदपुर पर ऐसी स्थिति खड़ी हो गई है जहां सपा रालोद के प्रत्याशी आमने सामने है।

ऐसा ही कुछ हाल रालोद का गढ़ माने जाने वाले बड़ौत का है यहां पर भी सपा और रालोद दोनों के प्रत्याशी चुनावी रण में उतर गए हैं। सहारनपुर और शामिली की भी कई सीटों पर इस तरह की स्थति नजर आ रही है। इसके अलावा मेरठ में भी आमने सामने की स्थति में सपा रालोद नजर आ रहे हैं। सपा ने जहां अपने विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को महापौर पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया है तो रालोद ने भी अब यहां से अपना उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया है।

सपा और रालोद के बीच का यह हंगामा पश्चिमी उप्र के जिलों में देखने को मिल हो रहा है क्योंकि रालोद का वजूद पश्चिमी उप्र तक ही सीमित है। यही कारण है कि रालोद उम्मीदवार पश्चिमी उप्र की निकायों में अपने उम्मीदवार घोषित करने की बात कह रहे हैं। रालोद का मानना है कि यहां सपा को यहां अपने उम्मीदवार घोषित नहीं करने चाहिए थे। हालांकि यही सपाई भी कह रहे हैं कि जहां रालोद का जोर है वहीं तो सपा भी लड़ेगी ताकि दोनों को लाभ हो सके। अहम यह है कि यदि यही स्थिति रही तो गठबंधन में आगे दरार आ सकती है। इसी गठबंधन के सहारे रालोद को विधानसभा चुनाव 2022 में पश्चिमी यूपी में आठ सीटें मिलीं थी जो बाद में उपचुनाव होने से नौ में बदल गई थीं। उपचुनाव में जीत के बाद ऐसा माना जा रहा था कि अखिलेश, जयंत और चंद्रशेखर की तिगड़ी यूपी में कुछ नया सियासी समीकरण गढ़ सकती है लेकिन निकाय चुनाव में गठबंधन की यह दरार आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रही।

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