वसीम जाफर पर सांप्रदायिक दाग लगाकर उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को आखिर क्या हासिल हुआ

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वसीम जाफर.

मनमीत, देहरादून : ये क्रिकेट भी अजब खेल हो गया। इसमें जितना माल है, उतनी ही सियासत भी। क्रिकेट संघों, एसोसिशनों की सियासत के चक्कर में उत्तराखंड के खिलाड़ियों को एक काबिल उस्ताद खोना पड़ा। हद तो ये है कि उस्ताद का नमाजी होना मुद्दा बना दिया गया और इसमें आग लगाई एक पत्रकार ने। जब इस घटिया हरकत की देश दुनिया में निंदा होने लगी तो आरोप लगाने वाले सफाई देते फिर रहे हैं। बहरहाल उस्ताद ने जिल्लत भरी दलदल से खुद्दारी में रहना पसंद किया और इस्तीफा दे दिया। (Uttarakhand Cricket Association Wasim Jaffer)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और कई अन्य सैलिब्रिटी के जाफर के समर्थन में किये गये टवीट के चलते ये पूरा मामला राज्य क्रिकेट से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। जिसके चलते क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड अब मुंह छुपाती दिख रही है।

भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और उत्तराखंड क्रिकेट टीम के हेड कोच पद से इस्तीफा दे चुके वसीम जाफर पर सांप्रदायिक होने के आरोप एसोसिएशन के सचिव महिम वर्मा ने लगाये थे। जाफर ने भी प्रेस वार्ता कर आरोप लगाये थे कि एसोसिएशन उनके काम में न केवल दखल देता हैं, बल्कि जो खिलाड़ी लायक ही नहीं, उसे टीम में शामिल करने के लिये दबाव डाला जाता है।


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उन्होंने सांप्रदायिक होने के आरोप पर बस इतना ही कहा कि उनका भारतीय क्रिकेट में लंबा इतिहास रहा है। आज तक किसी ने उनके खिलाफ ऐसे आरोप नहीं लगाये। क्रिकेट अपने आप में एक धर्म होता है। वहीं, मीडिया में जाफर की बात सामने आने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिन गेंदबाज अनिल कुंबले, इरफान पठान, डोडा गणेश और बल्लेबाज मनोज तिवारी समर्थन में आ गये।

सबने ट्वीट कर जाफर का समर्थन किया। कुंबले ने जाफर के सांप्रदायिक होने के आरोप पर कहा कि उनका पूरा कैरियर बेदाग रहा है। ये आरोप बेबुनियाद है।

उधर, मामला बढ़ता देख शुक्रवार को बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला देहरादून पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने एसोसिएशन के सचिव महिम वर्मा और उनके पिता पीसी वर्मा को तलब किया और बिना बात का विवाद खडा करने के लिये फटकार लगाई। बताया जाता है कि महिम वर्मा के सिर पर राजीव शुक्ला का हाथ होने के चलते ही उन्हें, पहले बोर्ड के उपाध्यक्ष का पद मिला।

वहां से बिना किसी कारण के दो महीने में ही हटाये गये तो फिर बोर्ड एसोसिएशन के बाईलाज के खिलाफ जाते हुये महिम तो लगातार चैथी बार ऑफिस बियरर बना दिया गया। महिम पर टीम चयन में दखलंदाजी करने का आरोप लगाकर जाफर ने इस्तीफा दिया तो देश भर में हंगामा मच गया। महिम ने जाफर पर आरोप लगाया कि वो कटटरपंथी है और मैदान में मौलवी बुलाकर नमाज पढ़ते हैं.

शुक्रवार को आया नया मोड

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के सचिव महिम वर्मा बैकफुट पर आ गये हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने ये आरोप कभी नहीं लगाया और न ही जाफर के खिलाफ उन्हें ऐसी कोई शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि टीम के मैनेजर नवनीत मिश्रा ने ये आरोप लगाये। महिम वर्मा ने बताया कि ये बयान हमारे टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा की ओर से दिये गये है।

मैंने उनसे लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है। वर्मा ने बताया कि नवनीत मिश्रा ने ही सबसे पहले मीडिया को ये बयान दिये। उधर, नवनीत मिश्रा ने बताया कि उन्हें एक स्थानीय पत्रकार का फोन आया था, जिसने मुझसे पूछा कि क्या चार पांच बार मौलवी आये थे। तो मैंने जवाब में बस इतना ही कहा कि नहीं, सिर्फ दो बार आये थे। नवनीति मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कभी भी जाफर के संप्रदायिक होने की बात नहीं की।

इस पूरे मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है। मुख्यमंत्री रावत भी पूर्व में उत्तराखंड को क्रिकेट मान्यता मिलने से पहले एक एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके थे। मान्यता के लिये उन्होंने अपने एसोसिएशन को क्रिकेट एसोसिएशन आफ उत्तराखंड के साथ खड़ा कर दिया था। उत्तराखंड के खेल विषेशज्ञ देवेंद्र सिंह नेगी बताते हैं, इस बिना बात के विवाद में जिसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा वो है उत्तराखंड के खिलाडी।

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