इस वजह से अपने गढ़ ‘भवानीपुर’ से नहीं लड़ेंगी ममता बनर्जी, इसी सीट से बनी थी सीएम

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पश्चिम बंगाल। विधानसभा चुनाव के लिए ममता बनर्जी ने कमर कस ली है। इस बार ममता बनर्जी अपने गढ़ भवानीपुर से नहीं नंदीग्राम से चुनाव लड़ रही हैं। ऐसा तीन सालों में पहले बार होगा जब ममता बनर्जी ने अपनी विधानसभा सीट बदली है।

1991-2011 तक ममता बनर्जी कोलकाता (दक्षिण) की सांसद रहीं, जिसमें भवानीपुर शामिल है और 2011 से वह भवानीपुर से विधायक रहीं। ममता बनर्जी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं भवानीपुर से चुनाव लडूंगी लेकिन मैं यहां से चुनाव लडू या ना लडू, भवानीपुर हमेशा मेरी मुट्ठी में रहेगा।

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राज्य के ऊर्जा मंत्री सोवनदेव चट्टोपाध्याय भवानीपुर से चुनाव लड़ेंगे। ममता बनर्जी ने आगे कहा कि मैं यहां हमेशा रहूंगी और निगरानी रखूंगी।

बता दें कि तीन दशक पहले 1991 में ममता बनर्जी पर हमला किया गया था, वो उस दौरान कांग्रेस की रैली का नेतृत्व कर रही थीं। इस दौरान ममता बनर्जी के सिर पर चोट आई थी।

ममता बनर्जी ने कहा कि मैंने घायल होकर, टूटे सिर के साथ कैंपेन किया था। लोगों ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया है। मैं लड़ी और यहां से आठ बार चुनाव जीती।

सोवनदेव चट्टोपाध्याय को भवानीपुर से उतारने पर ममता बनर्जी ने कहा कि उनका घर यही हैं, वो यहां स्थानीय क्लब में खेला करते थे।

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भवानीपुर सीट क्यों रही खास

माना जाता है कि भवानीपुर ने ममता का काफी साथ दिया है। केंद्रीय मंत्री से बंगाल की सीएम बनने का रास्ता भवानीपुर से होकर गुजरा।

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जिस तरह मोदी लहर चली इससे वोट शेयर तो कम हुआ ही साथ ही ममता के हाथ से भवानीपुर सीट भी निकल गई। 2011-14 के बीच भाजपा के वोट 5,078 से लेकर 47,465 पर पहुंच गए।

इस तीन सालों में ममता बनर्जी जो तीन चुनाव लड़ीं वहां वोट- शेयर गिरते चले गए। जैसे- 2011 के उपचुनाव में हुआ वहीं 2016 और 2019 के चुनावों में हुआ। लोकसभा में टीएमसी मात्र 3,168 वोटों पर ही सिमट कर रह गई।

 

 

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