केंद्रीय बजट 2021: किसानों के कल्याण को प्रतिबद्ध: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

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भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से सोमवार को केंद्रीय बजट 2021 प्रस्तुत करते समय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

सीतारमण ने कहा, “एमएसपी को आश्वस्त करने के लिए एक बदलाव किया है जो सभी वस्तुओं पर उत्पादन की लागत का कम से कम 1.5 गुना है।” गेहूं के मामले में 2019-2020 में किसानों को दी जाने वाली राशि 62,802 करोड़ रुपये थी और 2020-2021 में इसे बढ़ाकर 75,060 करोड़ रुपये कर दिया गया। कृषि अवसंरचना कोष को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये और सूक्ष्म सिंचाई कोष को बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये कर दिया।

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वित्तमंत्री ने कहा कि 1000 और मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय बाजार के साथ एकीकृत किया जाएगा और बुनियादी ढांचे की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कृषि बुनियादी ढांचा कोष एपीएमसी तैयार कराया जाएगा।

दिल्ली की सीमाओं पर दो महीने से डेरा डालकर जारी किसान आंदोलन के माहौल में बजट में वित्तमंत्री के आश्वासन और बजट से क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। किसानों की मुख्य मांग तीन नए कृषि कानून निरस्त करना और एमएसपी से नीचे खरीद को गैर कानूनी बनाने की है।

सरकार अच्छी तरह जानती है कि कृषि भारत की श्रम शक्ति का लगभग आधा हिस्सा है। कई लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती या उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं।

भारतीय किसान केंद्रीय बजट 2021 में ग्रामीण क्षेत्र- कृषि और खेती के लिए आवंटित किए गए खर्च का इंतजार कर रहे हैं। आंदोलनकारियों को सरकार के बजट पर ऐतबार न के बराबर है, इस बात को तरह-तरह से बताने की कोशिश भी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पहली पर किसान आंदोलन को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लाल किले पर प्रदर्शनकारियों की हरकत देश के “अपमान” का कारण बनी, किसानों की समस्या पर बात करने के लिए वह किसी भी समय तैयार हैं, सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी है।

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