कांग्रेस के इस नेता दिखाया ईवीएम हैकिंग का डेमो, लगाया गड़बड़ी का आरोप

द लीडर हिंदी : देशभर में एक बार फिर ईवीएम का मुद्दा गर्मा गया है.लगातार चुनावों में ये खबर मिलती है के ईवीएम में कुछ गड़बड़ी है.इस बार भी ईवीएम को लेकर सवाल उठ रहे है . 2024 लोकसभा की बिसात बिछने वाली है. और ईवीएम का मुद्दा छिड़ गया है.

वही विपक्ष बारबार आरोप लगाता रहा है कि ईवीएम में सेटिंग होती है और हैकिंग करके चुनाव परिणाम बदले जाते हैं. हालांकि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इसे नकारते रहे हैं, मगर अब एक बार फिर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ईवीएम की पोल खोली है. उन्होंने बाकायदा ईवीएम के हैक होने का डेमो दिखाया है.

बता दें हाल ही में एमपी में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस काफी मजबूत स्थिति में थी, इसके बावजूद बीजेपी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की. इसका मतलब साफ है कि ईवीएम में सेटिंग हुई थी. यही कारण है कि मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले ईवीएम को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने ईवीएम का डेमो प्रदर्शन कर गड़बड़ी का आरोप लगाया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल में ईवीएम का पत्रकारों के बीच लाइव डेमो दिखाया और कहा कि सिर्फ ईवीएम में गिने जाने वाले मत ही नहीं बल्कि वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची भी पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं है. इस दौरान दिखाया गया कि बटन किसी चिह्न पर दबाया जाता है और पर्ची किसी और चिह्न की निकलती है.वही दिग्विजय सिंह ने मीडिया के सामने ईवीएम एक्सपर्ट अतुल पटेल से पूरी मतदान प्रक्रिया का डेमो दिलाया.

सिंह ने कहा कि 140 करोड़ आबादी वाले देश में जहां 90 करोड़ मतदाता हैं तो क्या हम ऐसे लोगों के हाथ में ये सब तय करने का अधिकार दे दें? पूरी इलेक्शन प्रोसेस का मालिक न मतदाता है, न अधिकारी-कर्मचारी हैं. इसका मालिक सॉफ्टवेयर बनाने और सॉफ्टवेयर डालने वाला है.

दिग्विजय सिंह ने बताया कि पहले कौन सा ईवीएम कौन से बूथ पर जाएगा, ये कलेक्टर तय करते थे, अब ये रैंडमाइजेशन के नाम पर इलेक्शन कमीशन के सेंट्रल ऑफिस से लोड होता है. मशीन सॉफ्टवेयर की बात मानेगी, ऑपरेट करने वाले की नहीं मानेगी. आज विश्व के सिर्फ पांच देश में ईवीएम से वोटिंग होती है.

इनमें हिंदुस्थान, नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, वेनेजुएला और ब्राजील शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया में जो सॉफ्टवेयर डाला जाता है, वो ओपन है, जनता के बीच है. लेकिन, हिंदुस्थान में चुनाव आयोग ने अब तक सॉफ्टवेयर पब्लिक नहीं किया है.

Abhinav Rastogi

पत्रकारिता में 2013 से हूं. दैनिक जागरण में बतौर उप संपादक सेवा दे चुका हूं. कंटेंट क्रिएट करने से लेकर डिजिटल की विभिन्न विधाओं में पारंगत हूं.

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