पैगंबर मोहम्मद की बताई खाने की वो चीजें, जो अब सुपरफूड हैं: रिसर्च- (आखिरी कड़ी )

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पहली दो कड़ी में पैगंबर मोहम्मद के बताए खानपान का जिक्र हुआ और रिसर्च में शामिल बीमारियों और उनके इलाज के मौजूदा तरीकों पर बात हुई। जिन सुपरफूड की बात की गई है, ये किस तरह सेहत के लिए कारगर हैं, ये ब्योरा आखिरी कड़ी में दिया जा रहा है।

डेट्स (फीनिक्स डेक्टाइलिफ़ेरा)

खजूर मध्य पूर्व का मुख्य भोजन है और इस्लामिक देशों में बहुत लोकप्रिय है। डेट्स पैगंबर मुहम्मद के सबसे पसंदीदा भोजन थे। उन्होंने कहा था, “अगर कोई उपवास कर रहा है तो खजूर से उपवास तोड़े। खजूर नहीं है, तो पानी के साथ। ”

खजूर एक बहुउद्देशीय वृक्ष है जिसमें अत्यधिक औषधीय गुण होने के अलावा फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और विटामिन उपलब्ध होते हैं। ईद एट अल के अध्ययन के अनुसार खजूर से पॉलीफेनोल्स निकाले, जिसने कैंसर सेल लाइन पर निरोधात्मक प्रभाव दिखाया।

खान एट अल की खोज बताती है कि स्तन कैंसर एडेनोकार्सिनोमा (MCF7) कोशिकाओं पर भी एंटीकैंसर प्रभाव दिखा। लिहाजा कहा जा सकता है कि सहायक चिकित्सा के रूप में ऐसे खाद्य पदार्थों के औषधि उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है। लेबनान चूहों में इस प्रयोग को किया गया, जिसके सकारात्मक प्रभाव सामने आए।

लीवर यानी जिगर संबंधी परेशानियों का एक प्रमुख कारण दवाओं या दवाओं के जरिए शरीर में जहरीले रसायनों के तत्व पहुंचना हाेता है। कई अध्ययन हेपोरेटेनल विषाक्तता पर खजूर से सुरक्षात्मक प्रभाव को साबित करते हैं। प्रोएंथोसाइनिडिन से भरपूर खजूर का उपयोग कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4), थायोसिटामाइड (TAA) और लिवर में डाइमेथोएट विषाक्तता के उपचार या रोकथाम में किया जा सकता है।

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यह पाया गया है कि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) आहार का सेवन मधुमेह के प्रबंधन में उपयोगी है। उच्च फ्रुक्टोज की उपस्थिति के कारण खजूर को कम जीआई सुपरफूड के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, क्योंकि फ्रुक्टोज मीठा होता है और ग्लूकोज की तुलना में शुगर की मात्रा नुकसानदेह नहीं होती।

हसन और मोहिल्डिन ने स्ट्रेप्टोज़ोटोकिन डायबिटिक चूहों पर दो प्रकार के बीज के अर्क की मारक क्षमता का मूल्यांकन किया, अजवा और सउदी अरब के सुकरी। अर्क ने जिगर और गुर्दे का फंक्शन दुरुस्त किया और चूहों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेन यानी रक्त अशुद्धता को संतुलित किया।

गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं के लिए खजूर का विशेष महत्व है। प्रसव से पहले और बाद में महिलाओं द्वारा खजूर का सेवन गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य कर सकता है।

अल-कुरान एट अल के शोध का निष्कर्ष है कि डिलीवरी से पहले 4 हफ्तों में खजूर सेवन से लेबर पेन और डिलीवरी अनुकूल होते हैं। इसका कारण है कि खजूर एक उच्च फाइबर, लोहा, ट्रेस तत्वों, एंटीऑक्सिडेंट, समृद्ध ऊर्जा सामग्री के साथ कॉम्पैक्ट सुपरफूड हैं।

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अनार (पुनिका ग्रेनटम)

अनार (P. granatum) का व्यापक रूप से रस, जैम और अर्क के रूप में सेवन किया जाता है। अनार का उपयोग लंबे समय से विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। तथ्य ये भी है कि अनार कैंसर में रोकथाम के लिए कई जीन और प्रोटीन को एक्टिव करता है। अनार के पॉलीफेनोल्स जैसे कि पुंकेलागिन और एलाजिक एसिड के प्रभाव को रोकता है। अनार के जूस में स्तन, यकृत, त्वचा, और रक्त कैंसर पर कीमोप्रवेन्टिव होती है।

यही नहीं, अनार के पॉलीफेनोल्स में न्यूरोप्रोटेक्टिव तत्व होते हैं। वे याददाश्त बढ़ाते हैं। ऐसा वेस्ट एट अल द्वारा रिपोर्ट किया गया है। चूहों पर प्रयोग से ये भी सामने आया कि अल्जाइमर रोग में भी फायदेमंद है। इसी तरह अनार में प्यूक्टिनिन, पिकलिकलिन, एलाजिक एसिड और गैलिक एसिड शुगर रोगियों को लाभ देते हैं।

इसके अलावा अनार के रस का सेवन सिस्टोलिक रक्तचाप को कम करता है और सीरम एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम गतिविधि को रोकता है। अनार में मौजूद पॉलीफेनोल्स में एलडीएल ऑक्सीकरण, मैक्रोफेज फोम सेल निर्माण और एथेरोस्क्लेरोसिस को रोकने की क्षमता होती है।

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अंगूर (Vitis vinifera)

पैगंबर मुहम्मद अंगूर के बहुत शौकीन थे। अंगूर से प्राप्त फाइटोकेमिकल्स का उपयोग विभिन्न रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है। इसमें फ्लेवोनोइड्स, फेनोलिक एसिड और रेसवेराट्रॉल ऑदि पॉलीफेनोल यौगिकों की भरमार है।

महामारी विज्ञान के शोधों से पता चलता है कि इन यौगिकों के सेवन से हृदय रोगियों की मृत्यु दर कम हो जाती है। माओ एट अल के शोध में परिकल्पना है कि अंगूर के बीज कई गंभीर रोगों के इलाज में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इस पर वैज्ञानिक तरीके से निष्कर्ष निकाले गए हैं।

पिछले एक दशक में हुए कई प्रीक्लिनिकल अध्ययन से पता चला है कि स्किन कैंसर की रोकथाम में अंगूर के बीज के अर्क और इसके सक्रिय घटकों (प्रोन्थोसाइनिडिन) फायदा पहुंचाया। सिर, गले, फेफड़े, प्रोस्टेट, स्तन आदि के रोगों में भी लाभ मिला।

प्रोन्थोसाइनिडिन्स युक्त अंगूर के पत्तों और बीजों के एक जलीय अर्क ने एंटीहाइपरग्लाइसेमिक और एंटीऑक्सिडेंट प्रभाव दिखाया। एक संभावना है कि अंगूर या अंगूर की तैयारी का सेवन ग्लूकोज के लिए हानिकारक इंसुलिन प्रतिक्रियाओं वाले व्यक्तियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

अंगूर फ्लेवोनॉइड्स से भरपूर होते हैं, अंगूर या अंगूर युक्त उत्पादों के सेवन से रक्तचाप कम हो सकता है। अंगूर के फ्लेवोनोइड का एंडोथेलियल फंक्शन और सूजन पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है जो धमनी की कठोरता कम करने के साथ लो ब्लड प्रेशर को ठीक करता है।

काले बीज (निगेला सैटिवा)

काला बीज (N. sativa)जिसे कलोंजी के नाम से भी जाना जाता है, जिसे अक्सर काला जीरा कहा जाता है। यह मूल रूप से दक्षिण पश्चिम एशिया का पौधा है। विभिन्न पारंपरिक दवाओं के लिए ये औषधीय पौधा यूनानी, तिब्बती, आयुर्वेदिक विधियों लोकप्रिय है। यह पैगंबर मुहम्मद (PBUH)के बताए काले बीज हैं, जो कभी कहा करते थे, ”काला बीज हर बीमारी को रोक सकता है, मौत को छोड़कर।”

एन सैटिवा में थाइमोक्विनोन होताा है, जो लीवर की एंजाइम गतिविधियों को बेहतर बनाता है और एंटीहाइपरग्लाइसेमिक प्रभावों को बढ़ाता है। कंटर एट अल का अध्ययन ने बताया है कि इंसुलिन इम्युनोरैक्विटी और एन स्टैप्टोजोसिन डायबिटिक चूहों में सैटाइवा के बीजों के वाष्पशील तेल का अच्छा असर हुआ। टाइप 2 मधुमेह के रोगियों पर एन सैटिवा के प्रभाव की जांच बामोसा एट अल ने की थी।

उनके प्रयोगों के परिणामों से संकेत मिलता है कि सटाइवा के 2 ग्राम प्रतिदिन की एक खुराक टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में अत्यधिक लाभकारी हो सकती है। यह भी पता चला है कि सैटाइवा के कच्चे तेल में कैंसर कोशिकाओं के लिए कीमोप्रिवेंटिव क्षमता है। महमूद और टॉर्चिलिन के अध्ययन ने इसकी जांच की।

अंजीर (फिकस कारिका)

एफ कारिका मोरासी परिवार से संबंधित अंजीर मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया में पैदा हुई। इसका फल, बीज, पत्ते, छाल, फूल कई औषधियों में इस्तेमाल होते हैं। कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में इसका उपयोग हाेता है। डायबिटीज और वजन घटाने को लेकर चूहों पर प्रयोग हुआ, जो काफी हद तक सफल हुआ।

जैतून (ओलिया यूरोपा)

पवित्र बाइबल में जैतून के तेल और जैतून के पत्तों का प्राकृतिक उपचारक के रूप में उल्लेख है। पैगंबर मुहम्मद (PBUH) ने कहा, जैतून का तेल खाएं और अपने शरीर पर मालिश करें, क्योंकि यह एक पवित्र (मुबारक) पेड़ है। उन्होंने यह भी कहा कि जैतून का तेल 70 बीमारियों को ठीक करता है।

जैतून में मौजूद ओलिक एसिड को स्तन, प्रोस्टेट आदि कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रभावी पाया गया है। जैतून खाने से 25% स्तन, 15% आंतों और 10% प्रोस्टेट कैंसर की वृद्धि को रोका जा सकता है। ऑन्कोलॉजी के शोधकर्ताओं का कहना है कि ओलिक एसिड मानव जीनोम में कैंसर से लड़ सकता है।

जैतून के तेल की मालिश से जाेड़ों में सूजन और दर्द में लाभ होता है। इस पर भी प्रयोग करके नतीजे निकाले गए हैं। इसके तेल में पाया जाने वाला ओलोकेन्थल एक इन विट्रो साइक्लोऑक्सीजिनेज अवरोधक है जिसमें इबुप्रोफेन के समान एनाल्जेसिक गुण होते हैं।

एक प्रयोगशाला अध्ययन में पाया गया कि ओलेओकैंथल न्यूरोटॉक्सिक प्रोटीन की संरना को बदलकर अल्जाइमर रोग के विनाशकारी प्रभावों को कर देता है।

कई अध्ययनों से पता चला है कि जैतून के पत्तों में मौजूद एलुप्रोपीन (पत्तियों में शुष्क पदार्थ का 6% -9% तक) में औषधीय और स्वास्थ्य-संवर्धन गुणों की एक विस्तृत श्रृंखला होती है।

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