काशीपुर में डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की बिगड़ी तबीयत : अब इलाज से इनकार, पीड़ित परिवार ने लगाई गुहार

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द लीडर। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निजी अस्पताल में बेहतर इलाज दिलाने के लिए पीएम मोदी ने आयुष्मान योजना की शुरुआत की, लेकिन उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर के काशीपुर में निजी अस्पताल ने इस योजना को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। कागजों में तो इलाज अच्छा दिखा कर सरकार से आयुष्मान योजना के तहत पैसा लिया जाता है। लेकिन गरीबों का इलाज नहीं किया जाता है। और अगर कभी गरीब का इलाज कर भी दिया तो उसमें लापरवाही की जाती है।


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जी हां वैसे तो धरती पर डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। लेकिन इन दिनों डॉक्टरों के कारनामे किसी शैतान के कारनामों से कम नहीं होते हुए दिखाई दे रहे हैं। जिला उधम सिंह नगर के काशीपुर में स्थित स्पर्श हॉस्पिटल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जहां आर्थिक रुप से कमजोर परिवार की महिला बबीता देवी आयुष्मान योजना के तहत अपना रसोली का इलाज कराने स्पर्श हॉस्पिटल पहुंची।

ऑपरेशन के बाद मरीज की और बिगड़ी तबीयत

अस्पताल में महिला को आयुष्मान योजना के तहत भर्ती कर लिया जाता है। और डॉ. शिवानी सिंघल द्वारा रसोली का ऑपरेशन भी कर दिया जाता है। इसके साथ ही महिला को 7 से 8 दिन बाद डिस्चार्ज करके ऑपरेशन को सक्सेसफुल दिखाकर योजना का लाभ ले लिया जाता है। लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही के चलते महिला को अब और भी बड़ी समस्या हो गई है।

बबीता देवी अब पहले से ज्यादा बीमार होने लगी। जिसके बाद महिला फिर दोबारा इलाज के लिए हॉस्पिटल में आई। जहां अपनी लापरवाही छुपाने के चलते डॉक्टर शिवानी सिंघल ने मरीज को मेडिसन देकर 45 दिन तक गुमराह किया। लेकिन उस दवाई से भी महिला को कोई आराम नहीं मिला।

जांच रिपोर्ट में सामने आई डॉक्टर की लापरवाही

वहीं आराम न मिलने पर मरीज ने जब अपना अल्ट्रासाउंड किसी और हॉस्पिटल में करवाया तो जांच में पता चला कि, डॉ. सिंघल द्वारा किए गए ऑपरेशन के दौरान मरीज की यूरीन के थेली पर कट लग गया। जिस वजह से मरीज का यूरिन नहीं रुक रहा।

और जब मरीज के परिजनों ने डॉ. शिवानी सिंघल से मरीज को बचाने के लिए कहा तो डॉक्टर शिवानी ने कहा कि, ऑपरेशन करा लीजिए जो भी खर्चा होगा में दे दूंगी। लेकिन दिन गुजरने के बाद डॉ शिवानी सिंघल भी अपनी बात से मुकरती रही। और डॉक्टर के तेवर ही चेंज हो गए। वहीं डॉक्टर ने आयुष्मान योजना को दान योजना बताकर कहा कि, इस योजना में इलाज की कोई गारंटी नहीं होती और ना ही कोई सुनवाई होती है।

पीड़ित परिवार ने कानून से लगाई गुहार

फिलहाल दर बदर की ठोकरें खाने के बाद मरीज के परिजनों ने अब कानूनी रास्ता अपनाया है। और काशीपुर एसडीएम को लिखित रूप में शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। तो वहीं काशीपुर एसडीएम अभय प्रताप का कहना है कि, मामला संज्ञान में आया है और जो भी जांच में तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


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