कल जो हो सो हो-फिलहाल तो अपनी पसंदीदा पिच पर फंस गई टीम इंडिया

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The Leader. कल जो होगा सो हो जाएगा लेकिन टीम इंडिया को तीसरे टेस्ट में कंगारुओं का शिकार बनने से बस करिश्मा ही बचा सकता है. आस्ट्रेलिया को गावस्कर-बार्डर ट्राफी का तीसरा टेस्ट जीतने के लिए 76 रन चाहिए हैं. तीन दिन का वक़्त बचा है. रनों के एतबार से लक्ष्य कोई मुश्किल नहीं है. फिर भी क्रिकेट के लिए कहते यही हैं कि इसमें कुछ भी संभव है. इस रात के गुज़रने के बाद सुबह इंदौर के होलकर स्टेडियम में क्या होगा, उस पर दोनो देशों के क्रिकेट फैंस की नज़रें लगी हैं.


जब-जब हार का ग़म सताएगा भारतीय कप्तान हरमनप्रीत को वो एक ग़लती बहुत याद आएगी


दूसरे दिन मेहमान टीम को 199 रन पर समेटने के बाद जब टीम इंडिया खेलने उतरी तो लग रहा था कि बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब हो जाएगी. बावजूद इसके टीम के बड़े सितारे चमक नहीं बिखेर सके. कप्तान रोहित शर्मा से लेकर पूर्व कप्तान विराट कोहली ने निराश किया. शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर. शिखर भरत, रवींद्र जडेजा का बल्ला भी ख़ामोश रहा. भारत की दूसरी दीवार कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा ने टीम की लाज रख ली. एक तरफ विकेट गिरते रहे और सामने के छोर पर वो जमे रहे. जिस अंदाज़ा में पुजारा खेल रहे थे, टीम को जीत की दहलीज़ तक ले जाने वाली बेहतरीन इनिंग की उम्मीद सामने दिख रही थी लेकिन आस्ट्रेलिया के कामचलाऊ कप्ताने स्टीवन स्मिथ ने बेहद शानदार कैच लपककर भारत को मैच में फंसा दिया. तब तक पुजारा 59 रन बना चुके थे.


जडेजा के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और भारत का गावस्कर-बार्डर ट्राफी पर चौथी पर बार क़ब्ज़ा


पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी भारतीय बल्लेबाज़ आस्ट्रेलियाई स्पिनर का सामना करने में परेशान दिखाई दिए. नेथन लॉयन ने पहली पारी में तीन जबकि दूसरी में भारत के छह बल्लेबाज़ों को आउट किया. अब अगर 76 रन वो भी टेस्ट क्रिकेट में भारतीय स्पिनर नहीं बनने देते तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. फिलहाल तो भारत पर हार का ख़तरा सामने दिख रहा है. पसंदीदा पिच पर आस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को फंसा लिया है.