किसान आंदोलन पर सुप्रीमकोर्ट ने जताई चिंता, कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा

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नई दिल्ली : सुप्रीमकोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई है कि तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नजर नहीं आया है. चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीश पीठ ने टिप्पणी में कहा कि अदालत का मकसद किसानों और सरकार के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना और सुविधाजनक बनाना है. (Supreme Court Farmers Protest )

अदालत नए कृषि कानूनों की वैधानिकता (legality)को चुनौती देने वाले अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. बेंच में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्य शामिल थे. हालांकि सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत (Court) में कहा कि किसानों के साथ सरकार की बातचीत जारी है.

विवादित कृषि कानूनों को चुनौती देने के अलावा अदालत दिल्ली-एनसीआर के बाहरी हिस्सों में जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन को खत्म करने संबंधी याचिका भी सुन रही है. जिसमें सड़कें बंद किए जाने से नागरिकों को असुविधा का हवाला दिया गया है. ये याचिका विधि के छात्र ऋषभ शर्मा की ओर से दायर की गई है.

क‍िसान आंदोलन की फाइल फोटो

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कृषि कानून और किसान आंदोलन के मामले में सुनवाई की आवश्यकता नहीं है. क्योंकि अभी दोनों पक्षों के बीच संवाद चल रहा है. ‘आज तक’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस पर चीफ जस्टिस (Chief Justice)ने कहा कि हम सोमवार को मामले को देखेंगे. अगर बातचीत सकारात्मक रही तो सुनवाई टाल देंगे.

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दिल्ली (Delhi)की सीमाओं पर पिछले 41 दिनों से किसानों का धरना-प्रदर्शन (Protest) जारी है. किसान, तीनों कानूनों (Laws)को रद किए जाने की मांग पर डटे हैं. सरकार और किसान नेताओं के बीच सात दौर की बातचीत हो चुकी है, जो बेनतीजा रही है. अगली बातचीत 8 जनवरी को तय है.

इस बीच किसान आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर चुके हैं. सरकार के साथ बातचीत में कोई हल न निकलने की सूरत में गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर-ट्रॉली से परेड की घोषणा कर रखी है. इस बीच किसान नेताओं ने दिल्ली राजभवन के बाहर भी प्रदर्शन की योजना बनाई है.

बीते रविवार से दिल्ली का मौसम खराब है. कड़ाके की ठंड के बीच लगातार बारिश हो रही है. इससे आंदोलनरत किसान बेहाल है. बिस्तर, राशन भीगने और ठंड के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. किसान नेताओं के मुताबिक आंदोलन के दौरान अब तक 50 से अधिक किसानों की जानें (Death)जा चुकी हैं.

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