Presidential Election 2022 : द्रौपदी मुर्मू ने भरा नामांकन, PM मोदी बने प्रस्तावक, देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने की दहलीज़ पर

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द लीडर। एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस दौरान पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहे। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा और एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। इसके साथ विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है।


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राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू जब नामांकन दाखिल करने के लिए संसद पहुंचीं तो उनके साथ सत्तारूढ़ भाजपा और एनडीए के कई नेता आवेदन का समर्थन करने के लिए संसद में मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पहले प्रस्तावक बने। राष्ट्रपति पद के लिए उनका मुकाबला विपक्ष के यशवंत सिन्हा से है। 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है।

देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हो सकतीं हैं द्रौपदी मुर्मू

वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। जदयू और बीजद के समर्थन की घोषणा के बाद द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति चुना जाना तय माना जा रहा है। द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हो सकतीं हैं।

बता दें कि, एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के साथ ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बीजेपी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे।

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू ?

द्रौपदी मुर्मू का जन्म २० जून1958 में ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक आदिवासी परिवार में हुआ था। द्रौपदी मुर्मू एक भारतीय महिला राजनेत्री हैं। भारत के सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने भारत के अगले राष्ट्रपति के लिये उनको अपना प्रत्याशी घोषित किया हैं।

इसके पहले 2015 से 2021 तक वह झारखण्ड की राज्यपाल थीं। द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यापिका के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन आरम्भ किया। उसके बाद धीरे-धीरे राजनीति में आ गयीं। द्रौपदी मुर्मू उड़ीसा की आदिवासी महिला नेता हैं और झारखंड की गवर्नर रह चुकी हैं।

द्रौपदी मुर्मू की शिक्षा और राजनीतिक करियर

द्रौपदी ने अपने गृह जिले से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद भुवनेश्वर के रामादेवी महिला महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद एक शिक्षक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की और कुछ समय तक इस क्षेत्र में काम किया। द्रौपदी मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ, जिससे उनके दो बेटे और एक बेटी हुई।

दुर्भाग्यवश दोनों बेटों और उनके पति तीनों की अलग-अलग समय पर अकाल मृत्यु हो गयी। उनकी पुत्री विवाहिता हैं और भुवनेश्वर में रहतीं हैं। बच्चों और पति का साथ छूटना द्रौपदी मुर्मू के लिए कठिन दौर था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और समाज के लिए कुछ करने के लिए राजनीति में कदम रखा।


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द्रौपदी मुर्मू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ओडिशी से भाजपा के साथ ही की। भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्होंने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में हिस्सा लिया और जीत दर्ज कराई। भाजपा ने मुर्मू को पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा का उपाध्यक्ष बना दिया। इसके बाद ओडिशा में भाजपा और बीजू जनता दल की गठबंधन की सरकार में साल 2000 से 2002 कर वह वाणिज्य और परिवहन स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं।

साल 2002 से 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री के तौर पर काम किया। उन्होंने ओडिशा के रायगंज विधानसभा सीट से विधायकी का चुनाव भी जीता। बाद में साल 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं। वह राज्य की पहली महिला गवर्नर बनीं। वहीं अब उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।

जानिए कैसे होता है राष्ट्रपति पद का चुनाव

राष्ट्रपति के चुनाव में सीधे जनता की भागीदारी नहीं होती, इसके विपरीत जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले यानी सांसद और विधायक राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं। लेकिन जो सांसद या विधायक नॉमिनेटेड होते हैं वे इस चुनाव में भाग लेने के योग्य नहीं माने जाते। इसी तरह विधानसभाओं के सदस्य भी इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं।

प्रेसिडेंट के चुनाव के लिए एक इलेक्टोरल कॉलेज का गठन किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के चुने हुए सदस्यों और राज्यों के विधानसभा में चुने गए सदस्य वोट देते हैं। इसी कारण इसे इनडायरेक्ट इलेक्शन भी कहा जाता है। इलेक्टोरल कॉलेज में संसद के 776 सदस्य और 4,809 विधानसभा के सदस्य शामिल होते हैं। कॉलेज में कुल 10,86,431 वोट होते हैं।

प्रत्येक वोट की एक कीमत होती है। हर संसद के सदस्य के वोट की कीमत 700 होती है। ये कीमत राज्य की जनसंख्या के अनुसार तय होता है। नॉमिनेशन होने के बाद इलेक्शन प्रोसेस में शामिल होने वाले एमपी और एमएलए को वोट देने के लिए बैलेट पेपर दिए जाते हैं।

प्रेसिडेंट के इलेक्शन में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का इस्तेमाल किया जाता है। वोटर एक ही वोट देता है पर वह सभी कैंडिडेट्स में से अपनी प्रायॉरिटी तय कर देता है यानी वह बैलट पेपर पर बता देता है कि, उसकी पहली पसंद कौन है और दूसरी, तीसरी कौन। बैलेट पेपर पर कोई इलेक्शन प्रतीक नहीं मौजूद होता। जबकि पेपर पर दो कॉलम होते हैं और पहले कॉलम में कैंडिडेट का नाम लिखा होता है और दूसरे कॉलम में प्रिफरेंस ऑर्डर लिखा होता है।

18 जुलाई को चुनाव, 21 को आएंगे परिणाम

देश के 15वें राष्ट्रपति के चयन के लिए गुरुवार 9 जून को चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम का एलान किया था। आज द्रौपदी मुर्मू ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं नामांकन की अंतिम तारीख 29 जून है। 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनाव होगा और 21 जुलाई 2022 को परिणाम घोषित किया जाएगा। संयुक्त विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है।


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