दो महीने में तैयार हुई किसान आंदोलन की नई जमीन, 26 मार्च को भारत बंद का ऐलान

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(Kisan 26 January Parade Delhi)

देश और दुनिया में चर्चित हो चुका किसान आंदोलन नए तेवरों में आ गया है। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में परेड के बाद बड़े कार्यक्रम बतौर देशव्यापी भारत बंद 26 मार्च को होगा। इस कार्यक्रम से पहले किसान नेताओं ने देशभर में घूम-घूमकर किसान महापंचायतों की झड़ी लगा दी। इन किसान पंचायतों में हर जगह लाखों लोग जुटे, जिससे हौसला बढ़ता गया।

बंद से पहले 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर एक तरह से रिहर्सल किया गया, जिससे हर लिहाज से अनुशासन और खामी को परखा जा सके। फतेहगढ़ साहिब में 24 मार्च को किसान महापंचायत हुई, जिसमें पंजाब के किसान संगठनों और धार्मिक संगठनों की अगुवाई में हज़ारों किसानों ने भागीदारी की।

भारत बंद के सिलसिले में संयुक्त किसान मोर्चा के कोऑर्डिनेटर डॉ.दर्शनपाल ने बताया कि 26 मार्च को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक देशभर में सभी सड़क व रेल परिवहन, सभी बाजार व अन्य सार्वजनिक स्थान बंद रहेंगे। जिन स्थानों पर चुनाव होने जा रहे है वहां पर यह आवश्यक नहीं है।

उन्होंने कहा, इस दिन किसानों को दिल्ली के धरनों पर बैठे 4 महीने हो रहे हैं। सरकार किसानों की मांग मानने की बजाय आंदोलन को बदनाम कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे किसानों की आवाज को दबाने के नाकाम प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे देश की लाेकतांत्रिक छवि दुनिया में कमजोर हुई है।

किसान मोर्चा ने शिवमोगा में किसान नेता राकेश टिकैत पर एफआईआर दर्ज करने और बिहार विधानसभा में विपक्ष पर हुए हमले की निंदा की। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा चुने हुए प्रतिनिधियों पर पुलिस बर्बरता लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें हर आवाज को दबाने पर आमादा हैं। ऐसे ही काले कानूनों के विरोध में भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंका था, उस भावना का आज सरकारें अपमान कर रही हैं।

किसान मोर्चा की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि 23 मार्च को शहीद दिवस पर हरियाणा के भठगांव सोनीपत में मशाल जुलूस निकाला गया। मध्यप्रदेश के अशोकनगर में नौजवानों ने अपने खून से इंकलाब जिंदाबाद के नारे लिखे और बड़े स्तर पर ब्लड डोनेशन कैंप लगाया।

ओडिशा के राउरकेला में शहीद दिवस पर किसानों ने कार्यक्रम रखे। उतराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में AIDSO की अगुवाई में छात्रों ने किसानों के समर्थन में कार्यक्रम किए। AIKKMS द्वारा बलिया के निकासी से रासरा तक किसान यात्रा निकाली गई।

AIKKMS की अगुवाई वाली किसान यात्राएं टीकरी बॉर्डर पहुंची व कुरुक्षेत्र व सोनीपत में भी रैली निकाली गई। पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा में ISFTU व PYL के कार्यकर्ताओं ने शहादत दिवस मनाया और 26 मार्च के भारत बंद के सफल आयोजन की अपील की। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में किसानों द्वारा शहीद दिवस पर कार्यक्रम हुए। विशाखापट्टनम में किसानों द्वारा शहीद दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

NBS व AIKMS द्वारा प्रयागराज के घूरपुर से नारीबारी तक रैली निकाली गई व नुक्कड़ बैठकें की गई। चंडीगढ़ में AIDYO द्वारा रैली निकाली गई। तेलंगाना के मचेरिअल में अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में शहीदी दिवस पर रैली और सभा हुई जिसमें तीन खेती कानूनों को रद्द कराने, इलेक्ट्रिसिटी बिल 2020 वापस लेने और एमएसपी के लिए कानून बनाने की मांग उठाई गई।

किसान मोर्चा ने 26 मार्च को भारत बंद को सफल बनाने की अपील कर कहा कि ये किसानों के सम्मान के लिए है, सभी इसमें सहयोग करें।

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