मस्जिद-ए-नबवी के पूर्वी हिस्से में क्या करने जा रही है सऊदी सरकार, जो दस साल में बदल जाएगा नक्शा

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Masjid E Nabawi Madina
मस्जिद-ए-नबवी

द लीडर : मस्जिद-ए-नबवी इस्लाम का दूसरा सबसे पवित्र स्थल है, जिसके दीदार के लिए हर साल दुनिया भर से करोड़ों मुसलमान मदीना पहुंचते हैं. सऊदी सरकार ने इस ऐतिहासिक मस्जिद के पूर्वी इलाक़े के बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करने का फ़ैसला किया है. ‘मदीना विज़न’ प्रोजेक्ट के तहत इस हिस्से को भविष्य की भीड़ के लिहाज़ से संवारा जाएगा. क्राउंन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने इसके शुभारंभ का औपचारिक ऐलान कर दिया है. (Masjid E Nabawi Madina)

सऊदी किंगडम उस विज़न पर काम कर रहा है, जिसके अंतर्गत मदीना शहर में साल 2030 तक 30 मिलियन यानी तीन करोड़ अक़ीदतमंदों की मेज़बानी का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाना है. चूंकि साल दर साल मक्का और मदीना पहुंचने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है.

हरमैन शरीफैन की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी सरकार मदीना आने वाले अक़ीदतमंदों को शानदार सेवाएं मुहैया कराने को लेकर काफ़ी उत्सुक और गंभीर है. मदीना सिटी प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 1.5 मिलियन वर्ग किलोमीटर है, जोकि काफ़ी विशाल है. सरकार का लक्ष्य है कि अगले दस सालों में यहां 47 हज़ार हॉस्पिटैलिटी यूनिट स्थापित की जाएंगी, जो मेहमाननबाज़ी का काम करेंगी. प्रोजेक्ट का 63 फ़ीसद हिस्सा खुला रहेगा. इसे हरियाली के लिए आवंटित किया जाएगा. (Masjid E Nabawi Madina)


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मदीना विज़न प्रोजेक्ट यातायात के आधुनिक संसाधनों से भरपूर होगा. जहां नौ बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन, सेल्फ़ ड्राईविंग वाहनों के लिए एक अलग ट्रैक बनाया जाएगा. और भूमिगत पार्किंग होगी. मकसद बस यही है कि पैग़ंबर-ए-इस्लाम की मस्जिद आने वाले अक़ीदतमंदों को आवाजाही में आसानी रहे.

धार्मिक एतबार से सऊदी इस्लाम का केंद्र है. हर साल लाखों लोग हज अदा करने मक्का पहुंचते हैं. और करोड़ों लोग हज उमरा करने जाते हैं. हज या उमरा पर जाने वाले मक्का के बाद मदीना की मस्जदी-ए-नबवी में नमाज़ अदा करने ज़रूर जाते हैं. मस्जिद-ए-नबवी की स्थापना पैग़ंबर-ए-इस्लाम ने की थी.

मक्का और मदीना इन दोनों शहरों में हॉस्पिटैलिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर काफ़ी भव्य है. लेकिन जिस तेज़ी के साथ अक़ीदतमंदों की संख्या में इजाफ़ा हो रहा है-उसे देखते हुए भविष्य की पॉलिसीज पर काम किया जा रहा है. (Masjid E Nabawi Madina)

चूंकि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था तेल संपदा पर आधारित रही है. लेकिन अब वो इसके दूसरे स्रोत पैदा करने की कोशिशों में लगा है. जिसमें रीलिजियस टूरिज़्म सबसे बड़ा माध्यम है. हज इस्लाम के पांच बुनियादी सिद्धांतों में से एक है, जो हर सक्षम मुसलमान पर फ़र्ज है. दुनियाभर से हर साल लाखों मुसलमान ये फ़र्ज अदा करने सऊदी पहुंचते हैं.

सऊदी अरब तमाम आधुनिक बदलावों की प्रक्रिया से गुजर रहा है. आधुनिक शहरों की बसावट से लेकर नागरिकों, महिलाओं को और अधिकार दिया जाना शामिल है. क्राउंन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान लाल सागर के किनारे दुनिया का आठवां अजूबा जैसा शहर बसा रहे हैं. जिसका नाम द लाइन है, इसे नियोम प्रोजेक्ट के तौर पर जाना जाता है. साल 2025 तक ये शहर बनकर तैयार हो जाएगा. जिसमें 39.95 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

ये ऐसा शहर होगा, जिसकी झलक आपने हॉलीवुड की फ़िक्शन फ़िल्मों में देखी होगी. इस शहर की चौड़ाई 200 मीटर, ऊंचाई 500 मीटर और लंबाई 161 किलोमीटर होगी. पूरा शहर आधा किलोमीटर ऊंचे कांच के पहरे में होगा. वर्टिकल अंदाज़ में बनने वाला ये शहर खड़ा होगा. मतलब ऊंचाई पर बनेगा. जिसमें क़रीब 90 लाख लोग रह सकेंगे. इसकी तमाम ऐसी ख़ासियतें हैं, जो आम लोगों की कल्पनाओं से परे हैं.

कुल मिलाकर सऊदी सरकार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को चोटी के स्तर का आधुनिक बनाने की कवायद में जुटी है. मदीना विज़न प्रोजेक्ट भी इसी में से एक है. (Masjid E Nabawi Madina)


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