मदरसों का अस्तित्व समाप्त हो जाना चाहिए, मुस्लिम मूल रूप से हिंदू है : सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

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द लीडर। मदरसा शब्द ही नहीं होना चाहिए, मुस्लिम मूल रूप से हिंदू है. ये बयान एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिया है.

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि, मदरसों का अस्तित्व समाप्त हो जाना चाहिए.


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उन्होंने असम में सरकार द्वारा संचालित या फंडेड मदरसों को बंद करने वाले कानून के बारे में बात करते हुए कहा कि, मदरसा शब्द ही नहीं होना चाहिए. घर पर कुरान पढ़ाएं लेकिन बच्चों को स्कूल में विज्ञान और गणित ही पढ़ाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि, जब हम सत्ता में आए, तो महसूस किया कि, राज्य का पैसा एक विशेष धर्म की धार्मिक शिक्षा पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए.

मुस्लिम आबादी को तीन श्रेणियों में विभाजित

सीएम सरमा के अनुसार, राज्य की 36 प्रतिशत मुस्लिम आबादी को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- स्वदेशी मुसलमान, जो समान संस्कृति और भाषा साझा करते हैं, धर्मांतरित या देसी मुसलमान और वो जो भारत में बाहर से आए हैं. ये विस्थापित मुसलमान एक अलग संस्कृति का पालन करते हैं और अपने आपको मियां कहते हैं.

सीएम ने पहले कहा था कि, मियां मुसलमान बहुत सांप्रदायिक हैं और असम की संस्कृति को विकृत करने के लिए जिम्मेदार हैं. वह कहते हैं कि, अब सवाल यह है कि मियां को ऐसा क्यों नहीं कहा जाना चाहिए जब वे खुद अपने आपको उस नाम से पहचानते हैं.

एक मुसलमान मूल रूप से एक हिंदू है

उन्होंने यह भी कहा कि, उनके मुताबिक एक मुसलमान मूल रूप से एक हिंदू है. उन्होंने आगे कहा कि, उसे ‘घर वापसी’, या ‘पुनर्परिवर्तन’ की एक प्रक्रिया से जोड़ना, जहां कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस लौटता है, केवल एक विशेष वातावरण और उचित शिक्षा के जरिए ही संभव होगा.

वह कहते हैं कि, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को मंदिर जाना है या किसी देवता की पूजा करनी है. व्यक्ति को भारत को सबसे पहले रखना चाहिए और भारत के हितों के बारे में सोचना चाहिए.


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