कुम्भ:तीरथ की घोषणा से संत जोश में, अफसर परेशान

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ज्योति एस हरिद्वार

कुम्भ क्षेत्र में शंकराचार्य और अखाड़ों को कैम्प के लिये जमीन उपलब्ध कराने संबंधी नए मुख्यमंत्री के आदेश से संत समाज खुश है लेकिन इसके साथ मेला प्रशासन से जुड़े अफसरों के खिलाफ भी अभियान तेज हो गया है। संत समाज अब टेंट पंडाल लगाने, कथा प्रवचन पर रोक हटाने , नगर आयुक्त को हटाने और कुम्भ नगर बसाने की मांग कर रहा है। पहले से आवंटित धन अन्यत्र खर्च हो जाने की वजह से प्रशासन परेशान है कि मुख्यमंत्री का आदेश कैसे पूरा करें।

शंकराचार्य नगर, महामंडलेश्वर नगर और कुंभनगर की स्थापना के साथ कुंभ क्षेत्र में टेंट-पंडाल के साथ अन्न क्षेत्र चलाने को संत समाज की मांग तेजी पकड़ रही है। बैरागी अणियों के साथ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, शंकराचार्य और अन्य साधु-संत लगातार अब मुखर हुए हैं। महिला संतों का प्रतिनिधित्व करने वाले परी अखाड़े ने इस मामले में मेला अधिष्ठान को कोर्ट नोटिस देने तक की चेतावनी दे दी है, जबकि गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जगद्गुरू स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक को अल्टीमेटम तक दे दिया है। ऐसे में अगर राज्य सरकार हरिद्वार कुंभ मेला को उसके वृहद स्वरूप में स्थापित करती है तो उसके सहित मेला अधिष्ठान के लिए दिक्कतें पेश का सकती हैं।
गौरशंकर क्षेत्र में जहां महामंडलेश्वर नगर और शंकराचार्य नगर के साथ-साथ अखाड़ों की छावनी की स्थापना के प्रस्ताव को शुरूआती दौर में सरकार और मेला अधिष्ठान ने हरी झंडी दिखा दी थी। बाद में कोरोना संक्रमण के चलते सरकारी तौर पर एक-एक कर सभी इंतजाम और घोषणाओं को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के विरोध के बावजूद नजरअंदाज कर दिया गया। यहां बिजली, पानी और शौचालय तक की तैयारी तक नहीं की गयी। बैरागी अखाड़ों को उनके कैंप लगाने तक के लिए अब तक भूमि का आवंटन तक नहीं किया गया, जबकि बैरागी अणियों-अखाड़ों के पास हरिद्वार में अपना अखाड़ा सजाने, छावनी लगाने आदि की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बैरागी अणियां बैरागी कैंप क्षेत्र अस्थायी स्तर पर ही अपनी छावनी लगाती आयी है। इस बार अब तक उन्हें भूमि आवंटन न होने से उनके सामने परेशानी बनी हुई है। तीन बैरागी अणियों, निर्मोही अणि और दिगंबर अणियों के पास कुल मिलाकर 18 अखाड़े हैं और इन अखाड़ों के 950 से अधिक खालसे हैं। इन खालसों में 25 से 50 हजार तक साधु-संन्यासी होते हैं।
ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में ये लोग हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में आते हैं तो इंतजाम करना नामुमकिन नहीं तो बेहद मुश्किल अवश्य होगा।
कुंभ मेला क्षेत्र में रोजाना के स्तर साधु-संतों, संन्यासी और महात्माओं की तदाद बढ़ रही है। ऐसे में इनकी मांग को नजरअंदाज कर पाना, शासन-प्रशासन और सरकार के लिए आसान न होगा। और अगर इनकी मांग पूरी हुई तो मेला अधिष्ठान की दिक्कत बढ़ना तय है।

अधिकारियों के भ्रम में न फंसे सीएम: महंत नरेंद्र गिरि

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरि ने कहा है कि मुख्यमंत्री को अधिकारियों के भ्रम में न फंस कर निर्भीक निर्णय लेना चाहिए। कहा कि अब भी समय है सीएम चाहे तो 2010 की तरह को मेला की तैयारियों को संभव करा सकते हैं। मुख्यमंत्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ भी बैठक कर उनकी समस्याओं, उनकी व्यवस्थाओं की जानकारी लें तथा कथा पंडाल, प्रवचन पंडाल, अन्नक्षेत्र और टेंट-पंडाल इत्यादि लगाने की अनुमति दें।
शनिवार को जारी बयान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अधिकारियों ने कुंभ मेला की तैयारियों पर भ्रम में रखा और वह उससे बाहर नहीं निकल पाए।
उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी पूरी मेहनत, लगन, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें तो सिर्फ 10 दिन में कुंभ मेला की तैयारियों को हरिद्वार कुंभ 2010 की तरह संपूर्ण किया जा सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और संत समाज हर तरह से उसका सहयोग करने को तैयार है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ ह रावत के निर्णय ऐतिहासिक हैं जिससे उत्तराखंड मैं छाई मायूसी अब समाप्त हो रही है उन्होंने अपने तेज तरार और निर्भीक निर्णय से जनता में उत्साह का संचार किया है और यह विश्वास दिलाया है कि आने वाले दिनों में राज्य में और राज के लोगों की बेहतरी के लिए उचित और निर्भीक निर्णय दिए जाएंगे

नगर आयुक्त जयभारत सिंह को हटाएं

हरिद्वार। कुंभ क्षेत्र की लचर सफाई व्यवस्था और पेशवाई तथा महाशिवरात्रि स्नान के दौरान भी समुचित सफाई व्यवस्था न होने पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरि ने गहरी नाराजगी जतायी है। आयुक्त जय भारत सिंह के लापरवाह बने पर उन्हें पद से तत्काल हटाए जाने की मांग की है।

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