ब्रिटिश जज की टिप्पणी पर बोले जस्टिस काटजू : मेरा कोई पर्सनल एजेंडा नहींं, न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ने का इरादा

0
176
Justice Katju British Judge Political Party
जस्टिस मार्केंडय काटजू, फाइल फोटो-साभार फेसबुक

जस्टिस मार्केंडय काटजू


 

नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण कार्यवाही से जुड़े मेरे बयान और उस पर ब्रिटिश जज की टिप्पणी से, इंग्लैंड में मेरी काफी आलोचना हुई. बेशक, ब्रिटिश जज अपनी राय के हकदार हैं. लेकिन मैं भी यहां सीधे रिकॉर्ड रखना चाहूंगा.

मैंने, ब्रिटिश जज के सामने ऐसा कुछ भी नहीं कहा कि नीरव मोदी अपराधी हैं या नहीं. यह ट्रायल का विषय है. मैंने जो कहा, वो ये कि वह भारत में निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं कर सकता. इसलिए क्योंकि, भारतीय न्यायपालिका ने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. जितनी निष्पक्षता की उम्मीद उससे की जाती है, अब उतनी नहीं रही. पहले के कुछ लेखों में इसके कारणों पर बात कर चुका हूं. कुछ दूसरे रिटायर जजों के बयान भी हैं.

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायर होने के फौरन बाद राज्यसभा में उनकी नियुक्ति भी इसका एक सुबूत है. हाल ही में एक समारोह में सुप्रीमकोर्ट के एक सिटिंग जज, जस्टिस एमआर शाह और गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रमनाथ ने प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ की. क्या ये कार्यपालिका के सामने बेशर्मी जैसा नहीं है.


इसे भी पढ़ें : जस्टिस काटजू को ऐसा क्यों लग रहा कि भारत में अच्छे के बजाय काले दिन आने वाले हैं


 

दिल्ली और मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एपी शाह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि न्यायपालिका ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण करने के अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया है.

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद नीरव मोदी को एक बड़ा अपराध बता चुके हैं. इससे जुड़ा वीडियो यू-ट्यूब पर देखा जा सकता है. इसलिए नीरव मोदी की ट्रायल और मुकदमे से पहले ही निंदा कर चुकी है. चूंकि दोषी साबित होने तक निर्दोष होने का भी अनुमान रहता है.

ब्रिटिश जज ने कहा कि मेरा कोई पर्सनल एजेंडा है. ये बात पूरी तरह से असत्य है. मैं न तो किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य रहा और न ही ऐसा कोई इरादा रखता हूं.


इसे भी पढ़ें : इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उस शाम के गवाह हैं जस्टिस काटजू, जो शायर फैज अहमद फैज की जलवे से यादगार बन गई


 

दूसरी बात-जो ब्रिटिश जज ने कही-मैंने कई जजों के खिलाफ बयान दिए हैं. हां, मैंने गोगोई और कुछ दूसरे जजों के खिलाफ बात की है, जिन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष होने के बजाय देश की सत्तारूढ़ पार्टी की ओर झुकाव किया. ऐसा करके उन्होंने अपनी शपथ का उल्लंघन किया है.

ब्रिटिश जज ने अपने आदेश में, मेरे द्वारा पेश की गई सामग्री पर नजर रखी है. एक इसके सिवाय बिना सोच-विचार के झूठी टिप्पणियां की हैं. क्या मैंने न्यायपालिका को बदनाम क्या है, या न्यायपालिका ने अपने व्यवहार से खुद को बदनाम किया है?


इसे भी पढ़ें : समृद्ध, खुशहाल भारत बनाना है, तो नागरिकों को एक-दूसरे से झगड़ना बंद करना होगा : जस्टिस काटजू


 

नोट-(ये लेख जस्टिस मार्केंडय काटजू ने लिखा है, जो सुप्रीमकोर्ट के जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे हैं. अंग्रेजी के उनके लेख का ये हिंदु अनुवाद है. व्यक्त विचार निजी हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here