Inflation : परंपरागत ईंधन की ओर लौटने पर विवश गृहणियां, चौतरफा बढ़ती महंगाई का कब समाधान..?

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द लीडर। घरेलू गैस के दाम में एकमुश्त पचास रुपए की वृद्धि से देश के कई शहरों में घरेलू एलपीजी की कीमत अब एक हजार पन्द्रह रुपए से अधिक हो गई है. इस तरह देश के करोड़ों गैस उपभोक्ताओं को करारा झटका लगा है. पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से गैस के मूल्य लगातार बढ़ रहे हैं. डीजल पेट्रोल के दामों में भी आग लगी हुई है.

परंपरागत ईंधन की ओर लौटने पर विवश गृहणियां

केंद्र सरकार ने गरीबों को परंपरागत ईंधन से छुटकारा दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की थी. शुरुआती दौर में इस योजना का समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ा लेकिन रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने उन सभी गृहणियों को अपने परंपरागत ईंधन की ओर लौटने पर विवश कर दिया है.


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आज आम नागरिक सरकार से महंगाई से राहत पहुंचाने की उम्मीद कर रहा है. लेकिन सरकार ने रसोई गैस सिलिंडर पर पचास रुपए की बढ़ोतरी कर लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

अनाज और खाद्य तेल भी महंगे

गैस सिलेंडर की यह कीमत गरीब गृहणियों की पहुंच से बाहर हो चुकी है. वही पेट्रोल डीजल के साथ अनाज और खाद्य तेल भी महंगे होते जा रहे हैं. चौतरफा बढ़ती महंगाई के समाधान के लिए सरकार को तुरंत जमीनी प्रयास करने होंगे.

गेहूं की कीमतों में 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई

एक साल में खाद्य तेल से लेकर आलू और चाय तक हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक गेहूं की कीमतों में 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसका MSP 2015 रुपये प्रति क्विंटल है. इसका बाजार मूल्य MSP से 20 फीसदी ज्यादा है.

इसी तरह, आटे की कीमतें अप्रैल में 32.38 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गईं। जो जनवरी 2010 के बाद सबसे ज्यादा है। निकट भविष्य में एफएमसीजी कंपनियां आटा उत्पादों की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी करेंगी। मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक साल में आम आदमी की थाली में सब कुछ महंगा हो गया है.

रूस-यूक्रेन युद्ध से गेहूं के उत्पादन में गिरावट

विशेषज्ञों का कहना है कि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं के उत्पादन में गिरावट से आटे की कीमतों में तेजी आई है। युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण विदेशी बाजारों में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है। डीजल के दाम बढ़ने से गेहूं और आटे के दाम आसमान छू रहे हैं।

हालांकि, सरकार का कहना है कि इस साल गेहूं का अधिक उत्पादन कुछ राहत लाएगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 110 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जो 2020-21 में अनुमानित 109 मिलियन टन से अधिक है।

आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को गेहूं की कीमत बढ़कर 32.78 रुपये प्रति किलो हो गई। एक साल पहले यह 9.15 फीसदी बढ़कर 30 रुपये था। 156 केंद्रों पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को पोर्ट ब्लेयर में आटे का उच्चतम भाव 59 रुपये प्रति किलो रहा। पश्चिम बंगाल में सबसे कम भाव 22 रुपये प्रति किलो था।


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