History Of Rooh Afza | रूह अफ़ज़ा जिसका सौ साल बाद दूसरा विकल्प नहीं | Mufti Shaukat

द लीडर हिंदी : शर्बतों के शहंशाह रूह अफ़ज़ा का नाम ही काफी है. 100 साल बाद भी इसका दूसरा विकल्प तैयार नहीं हो पाया. यह और बात है कि कोशिशें बहुत हुईं और चल भी रही हैं लेकिन हकीम अब्दुल हमीद लालकुंआं की छोटी सी जगह में 100 साल पहले जिस शाहकार को ईजाद कर गए, उसे दूसरा बनाने वाला अब तक पैदा नहीं हुआ. आख़िर रूह अफ़ज़ा में ऐसा क्या ख़ास मिलाया जाता है, जिसके पीने के जिस्म तरोताज़ा हो जाता है. वैसे रूह अफ़ज़ा अपने नाम का भी आईनादार है. हकीम अब्दुल हमीन साहब ने इसका नाम भी बहुत सोचने-समझने के बाद रखा होगा. रूह अफ़ज़ा यानी रूह को तरोताज़ा करने वाला, जिसे अंग्रेज़ी में सोल रिफ्रेशर कहते हैं. दुनियाभर में इस शर्बत को पीने वाले अनगिनत लोग हैं लेकिन इसका फॉर्मूला सिर्फ़ हकीम अब्दुल हमीद और उनके बाद उनके वारिसों को ही पता है. द लीडर हिंदी ने इस बेमिसाल शर्बत के बनने से लेकर सीक्रेट फॉर्मूले को लेकर हमदर्द के फाउंडर मेम्बर मुफ़्ती शौक़त से दिल्ली के जामिया हमदर्द में बात की. सुनिए-उन्होंने हमारे रिपोर्टर अमजद ख़ान से बातचीत में क्या जानकारी दी है…

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