गौस-ए-आजम के जश्न की बहार, हर गली-कूंचे में लहराता मुहब्बत का निशान, बरेली में जुलूस

द लीडर : हुजूर अब्दुल कादिर जिलानी (Abdul Qadir Jilani), जिन्हें दुनिया गौस-ए-आजम या गौस-ए-पाक के तौर पर ज्यादा जानती है. जिनका पैगाम मुहब्बत है. जो मुश्किलों के भंवर में भी सच का दामन थामे रहे. हमारे सामने सादगी-अमनपसंद और इंसानियत के साथ जिंदगी गुजारने की अनगिनत मिसालें पेश कीं. उनकी याद में आज हर कूचा-ए-गली में जश्न की बहार छाई है. (Gaus E Azam Juloos)

आज 11वीं शरीफ है, जिसे मुस्लिम समाज गौस-ए-आजम की शान में मनाता है. जश्ने गौस-ए-पाक की महफिलें सजी हैं. बरेली में दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी-अहसन मियां की कयादत में पुराना शहर में शाम को जुलूस जुलूस निकलेगा. जिसमें करीब 70-80 अंजुमनें शामिल होंगी.

अंजुमन गौस-ओ-रजा टीटीएस के अध्यक्ष शरीफ नूरी ने बताया कि जुलूस की तैयारियां पूरी हैं. सुबह को महफिल हुई. हालांकि इस बार इलाके में सड़कों की सफाई ही हुई है और न ही गड्ढे भरे गए हैं.


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जबकि पिछले दिनों बारादरी में एक बैठक हुई थी. जिसमें पुलिस-प्रशासन और नगर निगम के लोग भी शामिल रहे. वहां साफ-सफाई और बेहतर व्यवस्था का भरोसा दिया गया था. लेकिन हकीकत में हुआ कुछ भी नहीं. इस बात का मलाल है. (Gaus E Azam Juloos)

शरीफ नूरी बताते हैं कि इस बार के जुलूस में डीजे, हुड़दंग पर सख्ती से मनाही है. जिसका पालन कराया जाएगा. जुलूस में औरतें भी नहीं आएंगी. सादगी के साथ जश्न मनाया जाएगा.

इस बीच खानकाह-ए-नियाजिया से एक जुलूस झंडा शरीफ पहुंचा है. जहां गौस-ए-आजम के झंडे का निशान है. खानकाह पर भी सुबह को फातिहा हुई. और लगातार महफिलें सज रही हैं. (Gaus E Azam Juloos)

खानकाह के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी बताते हैं कि खानकाह नियाजिया पर 22 और 23 नवंबर को जश्न-ए-चिरागां होगा. ये जश्न काफी मशहूर है, जिसमें देश भर से अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ती है.

अकीदतमंद गौस-ए-आजम की मुहब्बत में चिराग रौशन करते हैं. और दुआएं मांगते हैं. खानकाह पर एक लंबे अरसे से ये सिलसिला चलता आ रहा है. इस बार के जश्न की तैयारियां मुकम्मल हैं. (Gaus E Azam Juloos)

दरगाह ताजुश्शरिया और जमात रजा-ए-मुस्तफा की ओर से भी जश्न-ए-गौस-ए-आजम पर महफिलें सजाई जा रही हैं. जमात के उपाध्यक्ष सलमान मियां ने कहा कि ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से कार्यक्रम किए जा रहे हैं.ऑनलाइन कार्यक्रमों में उलमा-ए-कराम गौस-ए-आजम की जिंदगी की खूबियों को आम कर रहे हैं.

गौस-ए-आजम की जिंदगी हमारे लिए मिसाल है. सबक है कि हम दुनिया में कैसे मुहब्बत और इंसानियत के साथ रह सकते हैं. इस 11वीं शरीफ पर हम उनके पैगाम को जिंदगी में उतारें. अपने गांव-कस्बे, शहर और देश में भाई-चारे की डोर को मजबूत करें. गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को आगे बढ़ाएं. हर तरफ यही मैसेज आम किया जा रहा है. (Gaus E Azam Juloos)

 

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