पूर्व पीएम राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी की रिहाई और गुजरात से हार्दिक पटेल का कांग्रेस से इस्तीफ़ा

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Rajeev Gandhi AG Perarivalan
राजीव गांधी हत्याकांड में आरोपी एजी पेरारिवलन.

द लीडर : सुप्रीमकोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन को 30 साल बाद रिहा कर दिया है. शीर्ष अदालत ने रिहाई के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत, शक्तियों का इस्तेमाल किया. सुप्रीमकोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल द्वारा पेरारिवलन की रिहाई याचिका पर फ़ैसला लेने में देरी हुई है. इस कारण उनकी रिहाई ज़रूरी हो गई. पेरारिवलन, ने क़रीब 30 साल से जेल की सजा काटी है. 2018 में तमिलनाडु सरकार द्वारा दी गई सिफारिश के बावजूद अपनी रिहाई में देरी से दुखी होकर शीर्ष अदालत का रुख किया था. (Rajeev Gandhi AG Perarivalan)

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हत्‍या की गई थी. इस मामले में 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया. आरोप था कि पेरारिवलन ने इस हत्याकांड में इस्तेमाल की गई जैकेट के लिए 9 वोल्ट की दो बैटरी सप्लाई की थी. जांच में कोर्ट में साबित हो गया कि पेरारिवलन ने हत्या के मास्‍टरमाइंड शिवरासन को बैटरी खरीदकर दी थी. घटना के वक़्त पेरारिवलन 19 साल का था. पिछले 31 सालों से सलाखों के पीछे है. जेल में ही उसने पढ़ाई करके कई डिग्रियां भी हासिल कीं.

पूर्व प्रधानमंत्री हत्याकांड में पेरारिवलन समेत सात लोगों को दोषी ठहराया गया था. 1998 में इन सभी दोषियों को टाडा कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. बाद में पेरारिवलन ने तमिलनाडु सरकार द्वारा सितंबर 2018 में रिहाई के लिए की गई संस्तुति के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिहाई की पेटिशन फाइल की.


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सुप्रीमकोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव और बीआर. गवई की पीठ इस मामले में सुनवाई की. और फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसे अब सुनाया गया है. इसके बाद मामना जा रहा है कि मामले में दोषी नलिनी श्रीहरन, मुरुगन, एक श्रीलंकाई नागरिक समेत दूसरे 6 अन्य दोषी भी रिहा हो सकते हैं.

संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीमकोर्ट को विशेष शक्ति प्रदान करता है. जिसके तहत किसी इंसान को पूर्ण न्याय देने के लिए कोर्ट जरूरी निर्देश दे सकता है. संविधान का ये अनुच्छेद ये भी कहता है कि जब तक कोई दूसरा क़ानून लागू नहीं होता जाता, तब सुप्रीमकोर्ट का आदेश सर्वोपरि रहेगा. (Rajeev Gandhi AG Perarivalan)

यहां ये जानना दिलचस्प होगा कि बाबरी मस्जिद, राम जन्मभूमि मामले में भी सुप्रीमकोर्ट ने इसी 142 आर्टिकल का इस्तेमाल करते हुए फ़ैसला सुनाया था. और भोपाल गैस त्रासदी मामले में भी इसका इस्तेमाल हो चुका है.

सुप्रीमकोर्ट की जिस बेंच ने प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के आरोपी की रिहाई पर फ़ैसला दिया है. उस पीठ के दो जस्टिस, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बीआर गवई, शीना-बोरा हत्याकांड की आरोपी इंद्राणी मुखर्जी को ज़मानत देनी वाली तीन सदस्सीय खंडीपठ का हिस्सा रहे हैं. 2012 में मुंबई का ये चर्चित हत्याकांड है. जिसमें आरोपी इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी पर अपनी बेटी को अगवा कर हत्या का इल्ज़ाम लगा है. इस मामले में पीटर मुखर्जी को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है. इंद्राणी की ज़मानत याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीमकोर्ट का रुख किया था. जहां अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी है.

आख़िर में बात करते हैं कि गुजरात की है. गुजरात में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं तो इस बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस के युवा नेता हार्दिक पटेल ने लंबी नाराजगी के बाद पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. हार्दिक काफी अरसे से पार्टी से नाराज चल रहे थे. उन्हें राज्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से शिकायत थी कि वे युवाओं को पचा नहीं पा रहे हैं. और इसी वजह से राज्य में पार्टी सत्ता में नहीं लौट पा रही है. हाल ही में उदयपुर में हुए कांग्रेस के चिंतन शिविर में भी हार्दिक शामिल नहीं हुए. और अब उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है. चुनाव से पहले इसे कांग्रेस के बड़ा झटका माना जा रहा है.

हार्दिक पटेल देश के उन युवा नेताओं में से एक हैं, जो भाजपा की नीतियों के ख़िलाफ लड़कर चर्चा में आए हैं. गुजरात में पाटीदार आंदोलन खड़ा करने वाले हार्दिक पटेल का अगला ठिकाना क्या भाजपा ही होगी. इसकी संभावना ज़्यादा है और उनके इस्तीफे में भी इसकी झलक दिखती है. हार्दिक ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर, सीएए-एनआरसी, जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 का हवाला देते हुए कहा कि देश इनका समाधान चाहता था और कांग्रेस इसमें बाधक बनी थी. वो सिर्फ केंद्र सरकार के विरोध पर ही ध्यान लगाए थी. (Rajeev Gandhi AG Perarivalan)

हार्दिक ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि मैं जब भी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मिला तो उनका ध्यान सिर्फ मोबाइल पर लगता रहता था. इसके संदर्भ में हार्दिक ने राहुल गांधी की मोबाइल देखते हुए तीन तस्वीरें भी शेयर की हैं. उन्होंने कहा कि तीन साल पहले जब मैं कांग्रेस में शामिल हुआ था तो उम्मीद थी कि पार्टी राज्य के लिए काम करेगी. लेकिन पार्टी का ध्यान गुजरात पर है ही नहीं. बल्कि वो यहां के उद्योगपति, धार्मिक और राजनीतिक लोगों का तिरस्कार करती है. हार्दिक ने जिस अंदाज में अपना इस्तीफा कांग्रेस को भेजा है उससे काफी हद तक ये संकेत सामने आए हैं कि अब शायद वो भाजपा में शामिल होंगे.

इसलिए क्योंकि उन्होंने देश को मज़बूत नेतृत्व देने और देश के कुछ प्रमुख मुद्​दों का ज़िक्र करते हुए सरकार का बचाव किया है, वो उनकी अगली राजनीतिक पारी की राह के तौर पर देखा जा रहा है. हार्दिक के इस्तीफे को देखें तो उनके निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ही रहे हैं. (Rajeev Gandhi AG Perarivalan)


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