जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले में फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ ED ने दाखिल की चार्जशीट : 113 करोड़ रुपये के गबन का आरोप

द लीडर। प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी एक के बाद एक नेताओं पर शिकंजे कसता जा रहा है। नेशनल हेराल्ड केस में जहां एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लगातार पूछताछ की जा रही है। तो वहीं दूसरी तरफ अब ईडी ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े घोटाले में ईडी ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसके साथ ही उन पर 113 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगा है।

ईडी ने इन्हें बनाया आरोपी, 27 अगस्त को पेश होने के आदेश

क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े घोटाले में ईडी की तरफ से पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ दाखिल की गई चार्जशीट JKCA के तब के अधिकारी अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजानफर आदि को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने आरोपियों को 27 अगस्त को पेश होने के लिए तलब किया है।

पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला पर जम्मू एंड कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में करीब 113 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि, यह रकम एसोसिएशन के पदाधिकारी आपस में बांटकर खा गए हैं।


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ED ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को अपने आधिकारिक बयान में कहा कि, 4 जून 2022 को विशेष पीएमएलए कोर्ट, श्रीनगर के समक्ष धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत डॉ. फारूक अब्दुल्ला, अहसान अहमद मिर्जा, मीर मंजूर गजानफर और एक के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है।

अपने बयान में ईडी ने कहा कि, यह मामला जेकेसीए के फंड घोटाले से जुड़ा है। आरोप पत्र के अनुसार, जेकेसीए बैंक खाते से पैसों को संघ के पदाधिकारियों सहित असंबंधित पार्टियों से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया।

इस क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले में अहसान मिर्जा, मिर्जा के बेटे मीर मंजूर गजानफर के खिलाफ 28 फरवरी 2020, 18 दिसंबर 2020 और 25 फरवरी 2022 को तीन कुर्की आदेश जारी हुए थे। इसमें फारूक अब्दुल्ला से संबंधित कुल 21.55 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां भी संलग्न है।

फारूक अब्दुल्ला से कई बार पूछताछ कर चुकी है ED

क्रिकेट एसोसिएशन घोटाले से जुड़े मामलों में 84 साल के फारूक अब्दुल्ला से ED कई बार पूछताछ कर चुकी है। आखिरी बार उनसे 31 मई को श्रीनगर में करीब 3 घंटे तक सवाल किए गए थे।

जम्मू-कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके फारूक अब्दुल्ला ने इससे पहले 2019 में भी इस मामले में अपने बयान दर्ज किए थे। इसके बाद दिसंबर 2020 में ED ने उनकी करीब 11.86 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली थी। इसके अलावा भी ED की तरफ से उनकी करीब 10 करोड़ की अन्य संपत्ति भी जब्त की जा चुकी है।

फारूक अब्दुल्ला की कई संपत्तियों हो चुकी है कुर्क

इस मामले में एजेंसी द्वारा अब्दुल्ला से कई बार पूछताछ की जा चुकी है। फारूख अब्दुल्ला व अन्य कई लोगों की करीब 21.55 करोड़ रुपये की संपत्तियों को तीन बार में ईडी कुर्क कर चुकी है।

2002 से लेकर 2012 के बीच का है मामला

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में हुए फर्जीवाड़े का यह मामला 2002 से लेकर 2012 के बीच का है। जिस वक्त घोटाला हुआ, उस वक्त फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीएम थे। उसी दौरान केन्द्र सरकार ने जम्मू -कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के माध्यम से राज्य में खेल को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि के तौर पर 113 करोड़ रुपये का फंड मुहैया कराया गया था। लेकिन उस फंड में से करीब 43.69 करोड़ रुपये फर्जीवाड़े में चला गया।

2015 में केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने फारूक अब्दुल्ला सहित कई अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था। उसके बाद सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने भी मामला दर्ज कर लिया। अब ईडी भी इस मामले में लगातार फारूक अब्दुल्ला से पूछताछ कर रही है।

ऐसे हुआ घोटाला ?

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 2005 -2011 के दौरान बीसीसीआई द्वारा जो 109 करोड़ 78 लाख रुपये का फंड जम्मू -कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को दिया गया था, उस फंड का बंदरबाट किया गया। उस दौरान फारूक अब्दुल्ला राज्य के मुख्यमंत्री और जम्मू -कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। उनपर आरोप है कि, उन्होंने राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में अवैध तरीके से कई लोगों को नियुक्त करवाया। जिसके बाद इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।

साल 2015 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने क्रिकेट घोटाले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी। 11 जुलाई 2018 में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू की।

2018 से जारी है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

जेकेसीए के पदाधिकारियों के खिलाफ 11 जुलाई 2018 को सीबीआई ने दायर आरोपपत्र के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी। जेकेसीए को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और आरोपियों के खाते में 43.69 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का आरोप है। ईडी द्वारा इस मामले में अब तक 51.90 करोड़ रुपये का घपला सामने आया है, जिसमें से 21.55 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी द्वारा कुर्क की जा चुकी है।

अहसान अहमद मिर्जा को 2019 में किया था गिरफ्तार

इससे पहले ईडी ने 4 सितंबर, 2019 को जेकेसीए के तत्कालीन कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा को गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ 1 नवंबर 2019 को अभियोजन शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें मुकदमा चल रहा है।


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