असम के मदरसों पर क्यों चलाया जा रहा बुल्डोज़र, एक माह में तीसरा मदरसा ध्वस्त

द लीडर : भारत के पूर्वोत्तर राज्य (Assam) असम में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार मदरसों को लेकर काफ़ी आक्रामक रुख़ अपनाए है. अगस्त महीने में ही तीन मदरसों पर बुल्डोज़र चल चुका है. बुधवार को ज़िला बोंगाईगांव के कबाईटरी भाग-चार गांव के मरकजुल मा-आरिफ़ क्वारियाना मदरसे को बुल्डोज़र से ढहा दिया गया. इस मदरसे के शिक्षकों पर आतंकी कनेक्शन का आरोप है, जिसमें क़रीब 37 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. (Assam Madrasa Demolished Bulldozer)

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्​दीन ओवैसी ने असम सरकार की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि ये मदरसों को बदनाम करने की साजिश है.

क्वारियाना मदरसे के ध्वस्तीकरण मामले में एसपी स्वप्रीन डेका के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स कहा गया है कि ये कार्रवाई भवन निर्माण मानकों की अनदेखी पर की गई है. मसलन, मदरसा का स्ट्रक्चर काफ़ी कमज़ोर था जो बच्चों के लिए असुरक्षित था.

इससे पहले असम के बारपेटा में बांग्लादेश के प्रतिबंधित समूह के दो सदस्यों को पनाह देने के आरोप में एक मदरसे को ध्वस्त किया गया था. और इस मामले में मुहम्मद सुमन नामक एक शख़्स को इसी साल जनवरी में गिरफ़्तार किया गया था. (Assam Madrasa Demolished Bulldozer)


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बारपेटा से कांग्रेस सांसद अब्दुल खलीक़ ने कहा कि हम क्वारियाना मदरसे को ढहाए जाने की सख़्त लफ़्जों में आलोचना करते हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ अब तक तीन मदरसों को तोड़ा जा चुका है.

असम में मदरस शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले से ही काफ़ी आक्रामक तेवर दिखाते रहे हैं. पिछले साल 2021 में न्यूज़-18 की चौपाल में उन्होंने मदरसों को बंद करने का इरादा ज़ाहिर किया था. ये जानकारी शेयर करते हुए कि उनकी सरकार में क़रीब 700 मदरसे बंद हो चुके हैं, बाकी मदरसों को आधुनिक शिक्षा में ढाला जा रहा है.

असम की सरहद बांग्लादेश से सटी है. और यही वजह है कि पूर्वोत्तर के इस राज्य की राजनीति में उत्तर भारत के हिंदी पट्टी राज्यों की तरह धुव्रीकरण काफ़ी अहम माना जाता है. (Assam Madrasa Demolished Bulldozer)

असम में अवैध अतिक्रमण के ख़िलाफ़ एक ड्राईव चल रही है, जिसमें गांव के गांव खाली कराए जा रहे हैं या कराए जा चुके हैं. पिछले साल 2021 के सितंबर महीने में दरांग ज़िले के सिपाझर इलाक़े में अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसक झड़प हो गई थी. जिसमें सद्​दाम हुसैन और शेख़ फ़रीद नामक दो लोग मारे गए थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर ओपन फ़ायर झोंक दिया था. जिसकी वीडियो भी सामने आई थीं, उसमें एक फोटोग्राफ़र गोली से मारे गए मृतक की छाती पर कूदकर दिखाई दिया था. ठीक एक साल बाद फिर से असम सरकार के एक्शन देखने को मिलने लगे हैं. और मुस्लिम समुदाय इसकी आलोचना कर रहा है.


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