देश के इन तीन शैक्षिक संस्थाओं के 1200 मुस्लिम कैंडिडेट्स ने पास की नीट परीक्षा

द लीडर : मेडिकल की प्रतिष्ठित परीक्षा, नेशलम एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में इस बार मुस्लिम कैंडिडेट्स ने शानदार रिज़ल्ट दिया है. केवल तीन शैक्षिक संस्थानों से ही लगभग 1200 स्टूडेंट्स ने नीट क्वालिफ़ाई किया है. इसमें पश्चिम बंगाल के अल-अमीन मिशन, कर्नाटक के शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस और असम के अजमल फ़ाउंडेशन शामिल हैं. (Muslim Students Neet Result)

अल-अमीन मिशन का मुख्यालय हावड़ा ज़िले के खलतपुर में है. जो ज़कात, सदक़ा और आर्थिक सहयोग पर संचालित है. राज्य में इसकी 70 शाखाएं हैं, जिनसे 500 ज़्यादा छात्र-छात्राओं ने नीट में क़ामयाबी हासिल की है. इस बार संस्था के 1800 से अधिक छात्रों ने नीट की परीक्षा दी थी. अल-अमीन मिशन में अधिकांश छात्र बेहद ग़रीब परिवारों से आते हैं. उनकी सफलता ने इस मिशन का परचम बुलंद कर दिया है.

इसके संस्थापक नूरूल इस्लाम ने एक न्यूज़ वेबसाइट से बातचीत में कहा, हम छात्रों की प्रतिभा निखारने का काम करते हैं. उनके बुद्धि को बढ़ावा देते हैं. एक अच्छा माहौल देते हैं ताकि वह शानदार प्रदर्शन कर सकें. अपने मक़सद को हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका अदा करने के लिए हम ज़कात और सदक़ा फंड का इस्तेमाल करते हैं. नूरूल इस्लाम समुदाय से इस सामूहिक प्रयास में शामिल होने का अाग्रह करते हैं.


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अल-अमीन मिशन से सैकड़ें प्रोफ़ेसर, डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अफ़सर जुड़े हैं, जो इस शिक्षा के मिशन को शानदार तरीक़े से आगे बढ़ा रहे हैं. (Muslim Students Neet Result)

कर्नाटक का शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस अपनी शानदार शिक्षा व्यवस्था और रिज़ल्ट को लेकर अक्सर सुर्ख़ियों में रहता है. इस बार यहां से क़रीब 450 स्टूडेंट्स ने नीट में क़ामयाबी पाई है, जिसमें कई हाफ़िज भी हैं. 10 से ज़्यादा मदरसा पास आउट हाफ़िज छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करेंगे. उन्हें सरकारी सीटें मिलने की उम्मीद है.

मदरसों के कुछ छात्र ऐसे हैं, जो पारंपरिक शिक्षा हासिल करने के लिए कभी स्कूल-कॉलेज नहीं गए. उर्दू, अरबी के अलावा गणित, विज्ञान का अध्ययन भी नहीं किया. ऐसे छात्रों को शाहीन ने पढ़ाकर डॉक्टर बनाने की राह पर चला दिया है, ये वाकई शानदार और प्रेरणादायक है.

शाहीन ग्रुप अपने अनोखे मॉडल के तहत कई छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करा रहा है. जिसमें यहां के छात्र बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. (Muslim Students Neet Result)

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष और सांसद बदरुद्दीन अजमल, अजमल फ़ाउंडेशन संचालित कर रहे हैं, जो मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी परीक्षाओं की तैयारी कराता है. एकीकृत शैक्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत कमज़ोर, वंचित परिवार के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. इस बार अजमल फ़ाउंडेशन के 240 से अधिक छात्रों ने नीट में सफलता हासिल की है. पिछले साल क़रीब 100 छात्र नीट में सफल हुए थे.

अजमल फ़ाउंडेशन एक सामाजिक ट्रस्ट है, जो 17 साल पहले असम के होजई में स्थापित किया गया था. राज्य में इसकी 25 शाखाएं हैं, जो कौशल विकास, रोजगार सृजन, ग़रीबी उन्मूलन, राहत और पूनर्वास आदि क्षेत्रों में काम करता है. लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में इसके शानदार परिणाम ने पूरे देश का ध्यान खींचा है.

कामयाबी की ये उड़ान ऐसे वक़्त में सामने आई है, जब मदरसों को लेकर एक तरह की बहस छिड़ी है. इसमें बिहार के भी दस मदरसा छात्रों ने नीट क्वालिफाई किया है. देश कई और मदरसा पृष्ठभूमि से पढ़कर आगे बढ़ने वाले छात्रों भी नीट में शानदार स्कोर किया है. (Muslim Students Neet Result)


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