मीडिया कर्मियों के बाद अब वकीलों के भेष में आए बदमाशों ने मुख़्तार गैंग के शूटर को कोर्ट कैंपस में मार डाला

The Leader. हत्याओं का नया ट्रेंड शुरू हुआ है. पहले प्रयागराज शूटआउट में अधिवक्ता उमेश पाल को पुलिस कस्टडी में मार दिया गया. उसके बाद अतीक और उसके भाई अशरफ़ को पुलिस अस्पताल में मेडिकल के लिए ले गई थी तो वहां मीडिया कर्मी बनकर आए शूटर ने दोनों पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी. उसी अंदाज़ में अब लखनऊ कोर्ट में मुख़्तार अंसारी गैंग के शूटर बताए जा रहे संजीव जीवा की हत्या की गई. उससे पहले दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में एक ऐसी ही घटना हो चुकी है. बदमाश हाई सिक्योरिटी ज़ोन में वारदात अंजाम दे रहे हैं, जो क़ानून व्यवस्था के लिए खुली चुनौती दिख रही है.


अतीक हत्याकांड के बाद CM योगी का बड़ा बयान, यूपी में अब माफिया डरा नहीं सकते


बुधवार, 7 जून को संजीव जीवा सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचा था. उसी दौरान वकील के भेष में आए हमलावर ने उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया है. गोली लगते ही जीवा अदालत परिसर में ही गिर गया और वहीं दम तोड़ दिया. गोलीबारी में एक सिपाही और बच्चा भी ज़ख्मी हुआ है. जीवा यूपी के मुज़फ़्फ़नगर का रहने वाला था और फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद था. उसे मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जा रहा है. जीवा की हत्या के बाद अदालत के अंदर और बाहर अफरातफरी का माहौल देखने को मिला. इस दौरान वकीलों ने काफी हंगामा किया. घटनास्थल पर एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.


Bareilly News : माफिया अशरफ के गुर्गें बताए जा रहे हैं फायरिंग करने वाले


संजीव जीवा के बारे में जानकारी मिली है कि वो अपराध की दुनिया में आने से पहले मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता था. नौकरी के दौरान जीवा ने मेडिकल स्टोर के मालिक को ही अग़वा कर लिया. इस घटना के बाद उसने 90 के दशक में कोलकाता के कारोबारी के बेटे का भी अपहरण किया था. जिसमें दो करोड़ की फिरौती मांगी थी. इसके बाद संजीव जीवा हरिद्वार के नाजिम गैंग में शामिल हो गया और फिर सतेंद्र बरनाला के साथ भी जुड़ा. 10 फरवरी 1997 को हुए भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड के बाद से जीवा का नाम संगीन अपराधी के रूप में जाना जाने लगा. इस मामले में संजीव जीवा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. जीवा के तार मुन्ना बजरंगी गैंग से भी जुड़े. बताते हैं कि वो मुख्तार अंसारी के संपर्क में भी आ गया. मुख्तार को आधुनिक हथियारों का शौक था और जीवा के पास हथियारों को जुटाने का तिकड़मी नेटवर्क. आगे चलकर दोनों का नाम कृष्णानंद राय हत्याकांड में सामने आया. हालांकि इस मामले में 2005 में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़ संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा पर 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए है. इनमें से 17 मामलों में संजीव बरी हो चुका था. अब वो काफी समय से जेल में था. कुछ समय पहले उसकी संपत्ति भी प्रशासन ने कुर्क की थी.