संसद में बोले प्रधानमंत्री मोदी, किसान आंदोलन का सम्मान, मगर कृषि सुधार जरूरी

द लीडर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के बाद लोकसभा में तीन नए कृषि कानूनों को सुधार की दिशा में अहम कदम बताकर अपनी सरकार का इरादा साफ कर दिया है. वो ये कि इन कानूनों पर सरकार पीछे नहीं हटने वाली है. प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान आंदोलन का हम सम्मान करते हैं. मगर सुधार के लिए ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं. किसानों को कोई शंका है तो बताएं. कानूनों में फेरबदल किया जाएगा. पीएम ने कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने की जरूरत जताई है.

पीएम ने कहा क‍ि मैं किसान आंदोलन को पवित्र माानता हूं. भारत के लोकतंत्र में आंदोलन का महत्व है जो जरूरी भी है. जब आंदोलन जीवी किसी पवित्र आंदोलन को अपने लाभ के लिए निकलते हैं तो क्या होता है. जो दंगाबाज लोग जेल में हैं. आतंकवादी जेल में हैं. उनकी मुक्ति की मांग करने हैं . ऐसा करना इस किसान आंदोलन को अपवित्र करने का प्रयास है कि नहीं.


कांग्रेस नेता गुलामनबी आजाद को अच्छा दोस्त बताते हुए भावुक हुए पीएम मोदी


 

बुधवार को प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कृषि चुनौतियों से भरा क्षेत्र है. विपक्ष के साथियों ने इन कानूनों पर जो चर्चा की है. अच्छा होता कि उसमें तथ्य होते और असर पर चर्चा की जाती. जहां तक आंदोलन का सवाल है. किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं. जब वे पंजाब में थे. तब भी सरकार ने उनसे बात की और अब भी कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी सदन में खड़े होकर बोलने लगे. प्रधानमंत्री अपने आसन पर बैठ गए.

लोसकभा स्‍पीकर ओम बिरला ने अधीर रंजन से आसन पर बैठने को कहा-तब प्रधानमंत्री ने दोबारा बोलना प्रारंभ किया. पीएम ने कहा कि आंदोलनरत किसानों का हम आदर करते हैं. कानूनों में संदेह बताएं, जरूर बदलाव किया जाएगा.

मगर कानूनों को लेकर गलत धारणा पैदा की गई. जबकि सच्चाई ये है कि नए कानूनों से किसानों को एक विकल्प मिला है. वो जहां चाहें वहां अपनी उपज बेच सकेंगे. मंडियां खत्म नहीं होंगी. एमएसपी बरकरार रहेगी.

पीएम ने कहा कि कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि जब किसानों को ये कानून नहीं चाहिए तो क्यों लाए गए. क्या किसी किसान ने प्रधानमंत्री सम्मान निधि की मांग की थी, नहीं. फिर भी हमने सम्मान निधि योजना लागू की. स्वच्छ अभियान की मांग भी नहीं की थी-सरकार ने दस करोड़ शौचालय बनवाए. उन्होंने राजा राम मोहन राय, डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले के समाज सुधारों का जिक्र किया.

पीएम ने कहा कि देश को पब्लिक सेक्टर की जरूरत है तो प्राइवेट सेक्टर की भी. आज दुनिया में सबसे सस्ता डाटा भारत में है. हमें देश के नौजवानों पर भरोसा होना चाहिए. कोसते रहना अच्छा नहीं होगा. उन्हें बेईमान घोषित करना. ये कल्चर अच्छा नहीं है.

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