किसानों के साथ 11वें दौर की वार्ता से पूर्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी सरकार पर हमलावर

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केंद्र सरकार के 18 महीनों तक के लिए कृषि क़ानूनों के क्रियान्वयन को रोकने और इस बीच किसानों की समस्याएं सुनने के लिए एक संयुक्त समिति बनाने के प्रस्ताव को लेकर किसान संगठनों और सरकार के बीच दसवें दौर की वार्ता में कोई सहमति नहीं बन सकी. सरकार के प्रस्ताव को किसानों ने एक बार फिर ठुकरा दिया. (11th Round of Talks With Farmers Today)

लेकिन इस बीच ख़बर आ रही है कि सरकार के कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित कर देने का प्रस्ताव ठुकराने को लेकर किसान संगठनों में आम सहमति नहीं है. कई अखबारों की खबर के मुताबिक पंजाब के आन्दोलनरत 32 किसान संगठनों में से कुछ सरकार का प्रस्ताव मान लेने के पक्ष में भी थे. लेकिन सरकार के प्रस्ताव को मान लेने के पक्ष में एक चौथाई से भी कम संगठन होने की वजह से बहुमत से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया गया. क्योंकि बृहस्पतिवार को किसान संगठनों के बहुसंख्यक वोट प्रस्ताव को रद्द करने के पक्ष में डाले गए इसलिए सरकार का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया.

किसान नेताओं का मानना है कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता तब तक उनका आन्दोलन चलता रहेगा. संयुक्त किसान मोर्चा ने बृहस्पतिवार को बयान जारी कर तीनों कृषि क़ानूनों को पूर्णतः रद्द करने की मांग दोहराते हुए कहा कि इसे रद्द कराए बिना वे नहीं लौटेंगे. इसी बयान में यह भी कहा गया की किसान गणतंत्र दिवस पर सिर्फ़ दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर ही ट्रैक्टर रैली निकालेंगे. जबकि सरकार चाहती है कि किसान सिंधु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर या फिर ईस्टर्न एंड वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर रैली निकालें. इस मामले में भी अब तक गतिरोध बना हुआ है.

केंद्र सरकार का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद अब तक असमाधेय दिख रहे मुद्दों पर आज किसानों और सरकार के बीच 11वें दौर की वार्ता होने जा रही है.

11वें दौर की वार्ता के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कल सरकार पर हमला किया. राहुल ने ट्वीट किया कि रोज नए जुमले और बंद करो, सीधे-सीधे कृषि कानून रद्द करो.

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