क्या जीसीसी शिखर सम्मेलन खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकेगा

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पांच जनवरी को खाड़ी देशों के बीच इलाकाई तनाव और अर्थव्यवस्थाओं महामारी के चंगुल से निकालने को गल्फ कोआपरेशन काउंसिल (GCC) का शिखर सम्मेलन होगा। इस सिलसिले में काउंसिल के देशों के अधिकारियों ने 27 दिसंबर को वर्चुअल मीटिंग कर मुद्दों को स्पष्ट किया, जिससे रिश्तों में आई दरारें कम हो सकें। माना जा रहा है कि इस सम्मेलन के फैसले और नतीजों से भारत समेत कई एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था और कामगारों पर असर होगा।

बैठक के मेजबान रहे बहरीन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सऊदी की राजधानी रियाद में होने जा रहे जीसीसी शिखर सम्मेलन के 41 वें सत्र के लिए जमीनी काम करने को अफसरों की बैठक हुई। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, ओमान और कुवैत के विदेश मंत्रियों ने बैठक में भाग लिया, जबकि कतर का प्रतिनिधित्व वहां के विदेश राज्यमंत्री ने किया।

कतर के साथ पड़ोसी देशों की तल्खी जून 2017 से शुरू हुई। सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र ने कतर पर आतंकवाद का समर्थन करने और ईरान के बहुत करीब होने के आरोप लगाकर आर्थिक और कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए थे। यहां तक कि जमीन, समुद्र और हवाई नाकाबंदी कर दी। दूसरी ओर कतर ने आरोपों का बार-बार खंडन किया।

संबंध बहाल करने को नाकाबंदी करने वाले देशों ने 13 मांगों की एक सूची जारी की, जिसमें एक तुर्की सैन्य अड्डा बंद करने की मांग भी थी, जिसे कतर ने नामंजूर कर दिया। अभी रियाद ने विवाद के समाधान के लिए कवायद शुरू की। इसकी वजह अमेरिकी चुनाव में नरम रुख अपनाने वाले बिडेन का राष्ट्रपति चुना जाना भी बताया जा रहा है।

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क्षेत्रीय तनाव पर बयानों में आई नरमी

क्षेत्रीय विवादों का खात्मा करने की कोशिशें प्राथमिकता में हैं, ये वर्चुअल मीटिंग से जाहिर भी हुआ। बहरीन के विदेश मंत्री अब्देलातिफ अल-ज़ायनी ने ‘सऊदी अरब में खाड़ी के विवाद का हल खोजने की क्षमता’ पर भरोसा जताया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है कि जीसीसी ने ‘विभिन्न राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं में संयुक्त खाड़ी सहयोग का समर्थन और मजबूत करने पर सुझाव’ का एजेंडा तय किया है। इस बीच देखा जा रहा है कि खाड़ी संकट से जुड़ी बयानबाजी में कमी और नरमी आई है।

इस महीने की शुरुआत में सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा था, कतर पर नाकाबंदी मामले में अंतिम समझौता जल्द होने की उम्मीद है।मिस्र और यूएई ने तब से बातचीत को रजामंदी दी, हालांकि राजनयिक सूत्रों का कहना है कि यूएई समझौता करने से हिचक रहा है।

बताया जा रहा है कि शिखर सम्मेलन में सुलह का रास्ता नहीं बल्कि अंतिम व्यापक समझौता होगा। वार्ता के लिए सिद्धांत तय हो जाएंगे, कतर के लिए हवाई रास्ते खुलने की भी उम्मीद है। कतर ने दो मध्यस्थों कुवैत और अमेरिका से कहा है कि विदेश नीति समेत कोई भी संकल्प आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए।

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महामारी के झटके से अर्थव्यवस्था को उबारने की कोशिश

हाल ही में हुए रॉयटर्स पोल का अनुमान है कि 2021 में तेल पर निर्भर खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अनुबंध की उम्मीद है। पोल उद्योग विश्लेषकों द्वारा किया गया। विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी की अर्थव्यवस्था 2021 में 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। मध्य पूर्व और मध्य एशिया विभाग के पूर्व आईएमएफ निदेशक का कहना है कि खाड़ी सहयोग परिषद के छह सदस्य इस साल तेल मूल्य में कमी और कोरोनोवायरस महामारी के कारण संयुक्त तौर 7.6 प्रतिशत का अनुबंध कर सकते हैं।

वहीं, सऊदी अरामको ने हाल ही में घोषणा की कि इसका लाभ 73% तक गिर गया क्योंकि तेल की मांग पहले जैसी नहीं रही। सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है। तेल की कीमतों में गिरावट और कोरोनोवायरस महामारी से गहरी गिरावट खाड़ी सरकारों के लिए एक दोहरा झटका है।


भारत समेत एशियाई देशों को खाड़ी से उम्मीद

गौरतलब है, विदेश मंत्री एस जयशंकर कतर और कुवैत और उनके डिप्टी वी मुरलीधरन की ओमान यात्रा दिसंबर में ही हुई है। खाड़ी देशों के दौरे पर पहली बार भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) गए।

छह पश्चिम एशियाई देशों – यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन में लगभग 70% प्रवासी भारतीय रहे हैं। यूएई में भारतीयों की सबसे बड़ी संख्या 34 लाख रहती है। जो दुनिया भर के लगभग सभी एनआरआई का एक चौथाई हिस्सा रहा है। जबकि 26 लाख सऊदी अरब में और कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन आदि में 29 लाख प्रवासी भारतीय रहते रहे हैं।

ये वो आबादी है जिसके खाते से भारत आने वाली विदेशी धनराशि का लगभग आधा हिस्सा आया, लगभग 8 अरब यूएस डॉलर। यही कारण है कि भारत यूएई के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिसने पाकिस्तान सहित 12 देशों के नागरिकों के लिए काम और वीजा देना बंद कर दिया है।

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के अनुसार, भारत के बाद सबसे ज्यादा प्रवासी फिलीपींस के हैं। प्रवासन रिपोर्ट 2017 के अनुसार, खाड़ी देशों के कुल 28 मिलियन विदेशी श्रमिकों में से 16.9 मिलियन (60%) में दक्षिण एशिया के श्रमिक शामिल रहे हैं। कुल मिलाकर, 31.5% प्रवासी भारत के, इसके बाद बांग्लादेश (11%), पाकिस्तान (10.8%), इसके अलावा श्रीलंका, नेपाल और अफगानिस्तान से हैं।

 

 

 

 

 

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